यूपीए सरकार को सोमवार को अंतरिम बजट पेश करने के दौरान लोकसभा में अग्नि परीक्षा के कई दौर से गुजरना पड़ सकता है। तेलंगाना बिल मामले में खार खाए बैठे सरकार के ही पांच मंत्रियों ने जहां सदन में विरोध जारी रखने की घोषणा की है, वहीं एकजुट विपक्ष बिल पेश करने के तरीके पर सरकार के खिलाफ एकजुट हैं।
बसपा को छोड़ तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे के साथ-साथ बृहस्पतिवार को सदन में हुई शर्मसार कर देने वाली घटना के मामले में भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाए बैठा है। जबकि निलंबित हुए आंध्र प्रदेश के 16 सांसदों ने संसद भवन परिसर में तीखा विरोध जताने की धमकी दी है।
सरकार को चिंता इस बात की है कि अगर खुद उसके मंत्री ही अंतरिम बजट को रोकने पर आमादा हो जाएं और वेल में उत्पाद मचाना शुरू कर दें तो हालात संभालना बेहद मुश्किल होगा। बड़ी सिरदर्दी यह है कि सरकार के रणनीतिकार अब तक सीमांध्र क्षेत्र के अपने पांच मंत्रियों को मनाने में नाकाम रहे हैं।
माकपा महासचिव प्रकाश करात ने भी रविवार को बिल पेश करने के तरीके पर आपत्ति जता दी है। करात ने वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी से मुलाकात के बाद साफ तौर पर कहा है कि उनकी पार्टी नहीं मानती कि इस बिल को पेश कर दिया गया है।
इस मामले में शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस भी तेलंगाना विरोधियों के साथ है। ऐसे में सोमवार को सरकार को चौतरफा हमला झेलना पड़ेगा। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि उसे इसी दिन अंतरिम बजट पेश करना है।
अपनी ही सरकार का विरोध करेंगे पांच मंत्री
सरकार में शामिल सीमांध्र के पांच मंत्रियों पल्लमराजू, केएस राव, डी पुरनदेश्वरी, के सूर्यप्रकाश रेड्डी और चिरंजीवी ने सोमवार को सदन की कार्यवाही में बाधा डालना जारी रखने की घोषणा की है।
मारपीट मामले पर भी निशाने पर सरकार
बीते बृहस्पतिवार को सदन में मिर्च स्प्रे, चाकू लहराने और जमकर मारपीट होने की घटना मामले में भी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। विपक्ष का आरोप है कि तेलंगाना मामले को खुद सरकार ने राजनीतिक हित साधने के लिए इस कदर उलझा दिया कि सदन में शर्मनाक स्थिति पैदा हो गई। हालांकि स्पीकर ने इस मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंप कर विवाद में पानी डालने की कोशिश की है। मगर विपक्ष इस मुद्दे को भी सोमवार को ही पूरी ताकत से उठाने पर आमादा है।