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चोर से बन गया खूंखार आतंकी, जानिए कैसे नाम पड़ा 'टुंडा'

Sun, 18 Aug 2013 12:09 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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कुख्यात आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा का दिल्ली से भी पुराना नाता है। वर्ष 1943 में पुरानी दिल्ली के छत्तालाल मियां में टुंडा का जन्म हुआ। उसके पिता का लोहे की ढलाई काम करते थे।
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टुंडा की हरकतों को देखकर पिता ने पुरानी दिल्ली छोड़ने का मन बनाया और गाजियाबाद जिले के पिलखुवा में बाजार, खुर्द, रेलवे रोड पर जाकर बस गए। यहां टुंडा ने भाइयों के साथ कारपेंटर का काम किया।

घर वालों ने उसकी शादी जरीना नामक महिला से कर दी। संदिग्ध रहने वाला टुंडा अक्सर कई-कई दिनों के लिए गायब हो जाता था। 1981 में अचानक वह जरीना को छोड़कर गायब हो गया।
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कुछ समय बाद जब वह घर लौटा तो उसके साथ अहमदाबाद की दूसरी पत्नी मुमताज थी। बताया जा रहा है उस समय मुमताज की उम्र 18 साल थी, जबकि टुंडा 44 साल का था। जरीना से टुंडा के पांच बच्चे हैं, जबकि मुमताज से उसके यहां एक बच्चा है।

1985 में आईएसआई से ट्रेनिंग लेने के दौरान टुंडा अपनी पत्नी मुमताज को पाकिस्तान ले गया। बताया जा रहा है कि टुंडा ने पाकिस्तान में एक और निकाह किया।

पहली बार पुलिस के हत्थे लगे टुंडा के खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में 21 और गाजियाबाद में 13 मामलों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मामला दर्ज हैं।

टुंडा के खिलाफ पहला मामला 1956 में दर्ज हुआ था
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद का खास रहा अब्दुल करीम टुंडा के खिलाफ सबसे पहला अपराधिक मामला 1956 में दर्ज हुआ था। उस समय उसकी उम्र बहुत ही कम थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार टुंडा के खिलाफ पहला मामला चोरी का दर्ज हुआ था। गाजियाबाद पुलिस के रिकॉर्ड में टुंडा के खिलाफ 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा दिल्ली के सदर बाजार व मालवीय नगर थाने में भी मामले दर्ज हैं।

बांग्लादेश में बम बनाने के दौरान उड़ गया था हाथ
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 20 साल पहले बांग्लादेश में बम बनाने के दौरान धमाके में अब्दुल करीम का बायां हाथ उड़ गया था। इसके बाद उसका नाम टुंडा पड़ गया। वह युवाओं को बम बनवाने की ट्रेनिंग देने लगा।
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