आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा मेवात मॉड्यूल मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेना चाहता था। मेवात से गिरफ्तार मॉड्यूल के
सदस्य मो. राशिद और शाहिद ने इस बात का खुलासा किया है।
पाकिस्तान में बैठे लश्कर व आईएसआई के आकाओं के इशारे पर दंगों के नाम पर मुजफ्फरनगर के युवकों को जेहादी बनाने की साजिश रची जा रही थी। इसके लिए मॉड्यूल के लोगों ने शामली, मुजफ्फरनगर के एक शख्स को शामिल किया था।
अमर उजाला पहले ही इसका खुलासा कर चुका है कि पश्चिमी यूपी का एक शख्स मेवात मॉड्यूल में शामिल था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के सूत्रों ने बताया कि मॉड्यूल का मास्टर माइंड सुभान, मो. राशिद और मो. शाहिद तीनों मुजफ्फरनगर गए थे।
दंगों का लेना चाहते थे बदला...
यहां इनकी शामली के शख्स के अलावा कई लोगों से मुलाकात हुई थी। इनमें लियाकत और जमीर भी शामिल हैं। मॉड्यूल के सदस्यों ने शामली के व्यक्ति से दिल्ली में बैठकें की थीं।
हालांकि, मॉड्यूल के सदस्य मुजफ्फरनगर में जिन लोगों से मिले थे उन्होंने दंगों का बदला लेने की बात से इंकार कर दिया था और मॉड्यूल के सदस्य खतरनाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए थे।
मेवात मॉड्यूल के सदस्य मुजफ्फरनगर दंगों के अलावा मेवात से सट्टे राजस्थान के गोपालगढ़ कस्बे में वर्ष 2011 में हुए दंगों का भी बदला लेना चाहते थे। बदले की साजिश के लिए मॉड्यूल के सदस्य पाकिस्तान में बैठे जावेद चुटानी के लगातार संपर्क में थे।
मुंबई जैसे बड़े हमले के फिराक में थे
दंगों का बदला लेने के लिए पाकिस्तान से हथियार आने थे और दिल्ली में कई जगह मुंबई जैसी खुली फायरिंग और फिदायीन हमले करने थे।
हमले के लिए पैसे भारत के किसी राजनेता व उद्योगपति का अपहरण करके वसूले जाने थे।
स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि मुजफ्फरनगर के व्यक्ति के गिरफ्तार होने के बाद मुजफ्फरनगर दंगों के लिंक का ज्यादा खुलासा हो सकेगा।
दंगा पीड़ितों पर राहुल के बयान पर हुआ था विवाद
आतंकियों के मुजफ्फरनगर के युवकों के संपर्क में होने का खुलासा दिल्ली पुलिस ने अब किया है, लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी कुछ ऐसा ही दावा तीन महीने पहले कर चुके हैं।
राहुल ने इंदौर में अपनी रैली में कहा था कि आईएसआई मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों के संपर्क में है। उनके इस बयान पर भारी बवाल मचा था।
दिल्ली पुलिस ने हालांकि साफ किया है कि आतंकी जिन लोगों के संपर्क में थे, वे दंगा पीड़ित नहीं हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी कहा है कि दंगा पीड़ितों के आईएसआई के संपर्क में होने की कोई जानकारी नहीं हैं।