महापंचायत रोकने के बाद कांठ में धधकी आग शनिवार को मद्धम पड़ी। सुबह सात बजे रेल ट्रैक खाली कराकर हरिद्वार रूट पर रेल यातायात शुरू कराया गया लेकिन पहली ट्रेन दोपहर में गुजारी जा सकी। हालांकि देर शाम तक यातायात सामान्य नहीं हुआ था। लोगों में जबरदस्त दहशत है और फोर्स फ्लैग मार्च कर रही है। गिरफ्तार किए गए 62 लोगों को जेल भेज दिया गया है और इलाके में तनावपूर्ण शांति है। एसएसपी ने पत्रकार वार्ता कर बवाल के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।
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कांठ विधायक अनीसुर्रहमान के गांव अकबरपुर चैदरी में धर्मस्थल से लाउडस्पीकर जबरिया उतारने से शुरू हुआ बवाल भाजपा की महापंचायत रोकने पर शुक्रवार को हिंसात्मक हो गया था। प्रदर्शनकारियों ने रेल ट्रैक पर कब्जा कर रूट बाधित कर दिया था और पुलिस पर जबरदस्त पथराव किया। उन्हें हटाने की कोशिश में पुलिस ने खूब बल प्रयोग किया लेकिन रात तक ट्रैक से कब्जा नहीं हटवाया जा सका था जिससे ट्रेनें उस रूट पर नहीं चलीं। शनिवार को सबसे पहले कांठ से आठ किलोमीटर दूर पेली विश्नोई में फोर्स ने ट्रैक खाली कराया और ट्रायल ट्रेन सात बजे गुजारी गई। बाद में दस बजे मालगाड़ी गुजारने के बाद दोपहर में पहली यात्री ट्रेन 12.10 पर रामनगर हरिद्वार को इस रूट से निकाला गया। देरशाम तक यातायात सामान्य नहीं हुआ था और ट्रेनें निर्धारित समय से तीन से पांच घंटे की देरी से चल रही थीं।
पुलिस पर पथराव करने, हिंसा, जानलेवा हमला, ट्रैक क्षतिग्रस्त करने समेत तमाम धाराओं में गिरफ्तार 62 लोगों को पुलिस ने आज जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के विरोध में भाजपाईयों ने कई जगह प्रदर्शन किया। अकबरपुर चैदरी से लेकर कांठ तक संगीनें ही दिखाई दे रही हैं। आंखों में दहशत है और लोग घरों से कम ही निकले। कांठ बवाल की आंच महानगर और आसपास के जिलों तक महसूस की जा रही है। दहशत जदा लोगों ने उधर का सफर फिलहाल कैंसिल कर दिया है।
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अकबरपुर चैदरी से पलायन कर रहे दलित
प्रदेश की सियासत में सुर्खियां बन चुका अकबरपुर चैदरी गांव अभी भी दहशत में है। इस गांव से दलित परिवार पलायन कर रहे हैं। जो लोग रह भी रहे हैं उन्होंने अपने बच्चों को रिश्तेदारियों में भेज दिया है। लोग खेतों पर भी नहीं जा रहे हैं। कई लोग तो ऐसे भी मिले जो इस गांव को छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाने की बात कर रहे हैं।
अकबरपुर चैदरी कांठ के विधायक अनीसुर्रहमान का गांव है। इस गांव में तनाव उस वक्त फैला जब यहां के धर्मस्थल पर लगे लाउडस्पीकर को पुलिस ने जबरन उतार दिया। विरोध करने वालों पर लाठियां बरसाईं। कई लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। हालांकि इस गांव में भारी फोर्स तैनात है मगर हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस गांव से दलित परिवारों का लगातार पलायन हो रहा है।
भागवती का कहना है कि वह लोग डर के मारे अपने खेतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं। चारा ला नहीं सकते लिहाजा पशुओं को भी रिश्तेदारों में भेज दिया है। करन सिंह, राजकुमार, मलखान, ओमकार और रिंकू का कहना है कि हमारे गांव में सभी लोग प्रेम भाव से रहते हैं। लेकिन पिछले दिनों कुछ लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाकर धर्मस्थल से जबरन लाउडस्पीकर उतरवा दिया है। तब से रिश्तों में खटास आ गई है। इस गांव में बीस से ज्यादा मकानों में ताले लगे हुए हैं। कुछ ऐसे भी परिवार हैं जो सुबह को तो गांव में पहुंच जाते है मगर शाम ढलते ही गांव छोड़ देते हैं। इन्हें डर है कि कहीं उनके साथ कोई अनहोनी न हो जाए।
रेल यातायात को झंझोड़ गया बवाल
कांठ में हुए बवाल ने रेल यातायात को पूरी तरह से बिगाड़ दिया। शुक्रवार की दोपहर से बंद हुआ मार्ग पर 22 घंटे के बाद ट्रेनों का संचालन हुआ। रेलवे ने जब तक प्रशासन से लिखित में हालात सामान्य होने का आश्वासन मिलने के बाद ही ट्रेनें गुजारी गईं। रूट बदलकर चलाई गई गाड़ियां अपने समय से भटक गईं। ट्रेनों का संचालन पटरी पर लाने में दो दिन का समय लगेगा।
महापंचायत रोके जाने को लेकर गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कांठ स्टेशन के नजदीक ट्रैक पर कब्जा कर लिया। जिसके चलते ट्रेनों को रूट बदलकर चलाया गया। दिल्ली मुरादाबाद रूट पर ट्रैफिक बढ़ने से गाड़ियों का संचालन पूरी तरह से चरमरा गया। शुक्रवार को तीन घंटे ट्रेनों के खड़े होने से लखनऊ तक गाड़ियों की लाइन लग गई। इन्हें निकालने में रेलवे प्रशासन के पसीने छूट गए। शुक्रवार की शाम को गाड़ियां चार से आठ घंटे लेट चलीं। शनिवार को 11 बजे ट्रेनों का संचालन कांठ होते हुए शुरू हुआ तो रेलवे प्रशासन ने राहत की सांस ली। शनिवार को देर शाम तक गाड़ियां पटरी पर नहीं आ पाईं। रविवार को देर शाम तक गाड़ियां अपने समय पर चल पाएंगी।
एडीआरएम हितेंद्र मल्होत्रा का कहना है कि शुक्रवार को तीन घंटे ट्रेनों के खड़े होने संचालन बाधित हुए। रूट बदलकर गाड़ियों को चलाने से दिल्ली रूट की गाड़ियां भी प्रभावित हो गईं। रविवार की शाम तक गाड़ियां अपने समय पर चल पाएंगी।
कांठ को हर रोज 50 लाख का नुकसान
कांठ के बवाल ने कारोबार की गाड़ी को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। हर रोज पचास लाख से भी ज्यादा का नुकसान है। यहां बैंडेज का सबसे बड़ा कारोबार है जो पिछले दस दिनों से ठप है। साढ़े तीन सौ से ज्यादा दुकानों का बाजार है जो लगातार बंद है। छोटे कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होने लगा है।
कांठ का पूरा मार्केट ग्रामीण इलाकों से जुड़ा है। यहां बैंडेज बनाने के तमाम छोटे बड़े कारखाने हैं। किराना की दुकानें हैं। रेडीमेड का भी बड़ा कारोबार है। यहां करीब साढ़े तीन सौ दुकानें हैं। लेकिन छब्बीस जून से यह सभी दुकानें बंद हैं। छोटे दुकानदारों के सामने तो बड़ा संकट आ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष साहू मुन्नन ने बताया कि करोड़ों का नुकसान हो चुका है मार्केट को। किसी को व्यापारियों के हितों की परवाह नहीं है।
दुकानदार चाहते हैं कि अगर प्रशासन यह भरोसा दे कि व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा तो वह बाजार खोल देंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह सीधे उन लोगों से वार्ता करे। कुलदीप विश्नोई, हरिओम, रिषीकांत ने बताया कि लगातार दुकानें बंद रहने से लोगों के घरों में जरूरी सामान की किल्लत होने लगी है।
बवालियों के पत्थर से घायल जिलाधिकारी चंद्रकांत का चेन्नेई के शंकर नेत्र चिकित्साल में इलाज शुरू कर दिया गया है। उन्हें आज डा. प्रमोद भिंडे के टीम ने देखा और पाया कि रेटिना का प्रेशर बहुत बढ़ा हुआ है। आंखों में खून का थक्का जमा है और लेंस और कैप्सूल जिसपर लेंस टिका होता है पत्थर लगने के कारण टूटकर अंदर चले गए हैं जिससे आंखों की रोशनी फिलहाल चली गई है। डाक्टरों ने कहा कि है कि पहले आंखों का प्रेशर कम किया जाएगा और सामान्य होने पर ही आंख का आपरेशन किया जाएगा। छह सप्ताह बाद ही यह कहने की स्थिति बनेगी कि आंखों की रोशनी पूरी तरह लौटेगी या नहीं। डीएम के साथ उनकी पत्नी बेटा और डिप्टी सीएमओ डा. रंजन गौतम हैं।
कांठ स्टेशन पर बवाल के दौरान पथराव में जिलाधिकारी चंद्रकांत की आंख चोटिल हो गई थी। यहां से उन्हें चेन्नई के शंकर नेत्र चिकित्सालय भेजा गया था। मुरादाबाद के डिप्टी सीएमओ डा. रंजन गौतम के साथ वह चेन्नई अस्पताल में सुबह नौ बजे पहुंचे। डा. गौतम ने बताया कि डा. प्रमोद की टीम ने उन्हें देखा और आंख में गंभीर चोट की बात बताई है। टीम का कहना है कि आंखों का प्रेशर बहुत बढ़ा हुआ है और खून जमा है, सूजन बहुत कम है। पहले इसे ठीक किया जाएगा।
संभव है कि आंखों का प्रेशर कम करने के लिए आपरेशन करना पड़े। चेन्नई अस्पताल में उन्हें कम से कम तीन सप्ताह तक रहना पड़ सकता है। डाक्टरों ने बताया कि कार्निया बच गई है जिससे उम्मीद है कि रोशनी लौट आए लेकिन कितनी आएगी यह छह सप्ताह ही बताया जा सकता है।