सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वास्तविक मालिक ही किराएदार से अपनी मकान या दुकान खाली करा सकता है। बीच का कोई व्यक्ति, एजेंट या अन्य इस मामले में बीच में नहीं आ सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ के इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए किराएदार की याचिका पर नोटिस जारी किया है।
जस्टिस पी.सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किराएदार गिरिराज किशोर (मृत) के कानूनी वारिसों की ओर से दाखिल याचिका पर प्रतिपक्षों को नोटिस जारी किया। पीठ के समक्ष अधिवक्ता डीके गर्ग ने कहा कि एजेंट राजाराम मेरे मुवक्किल से अगनलाल और बुद्धसेन की ओर से किराया एकत्र करता था। लेकिन कुछ समय बाद उसने अपनी पत्नी चंदा देवी को दुकान मालिक बताकर उसके नाम पर किराया लिया। जब इस बारे में मुवक्किल को जानकारी हुई तो उसने अदालत में किराया जमा करना शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया कि एजेंट की पत्नी ने रसीदों के आधार पर दुकान खाली कराने का नोटिस भेजा और बाद में दावा भी दाखिल कर दिया। इस दावे पर निचली अदालत ने खारिज कर दिया। इसके खिलाफ चंदा देवी ने पुनर्निरीक्षण दावा किया जिसे अनुमति मिल गई और इसके बाद हाईकोर्ट ने भी इस मामले में मुवक्किल की याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि वास्तविक मालिक के सिवा कोई और किराए पर दी गई दुकान या मकान खाली नहीं करा सकता। अदालत हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाती है और प्रतिपक्षों को नोटिस जारी करती है।