अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आयोजित बंद की वजह से तेलंगाना और हैदराबाद में तनाव की स्थिति बनी हुई है। हैदराबाद और तेलंगाना में स्कूल और कॉलेजों सहित अन्य शिक्षण संस्थान बंद हैं। तेलंगाना स्टूडेंट्स यूनियन और उस्मानिया यूनिवर्सिटी ज्वाइंट एक्शन कमेटी के छात्रों ने संयुक्त रूप से इस बंद का आह्वान किया है।
ये छात्र रविवार को 'तेलंगाना मार्च' के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इधर तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रमुख ए कोदांदरम ने 2 अक्टूबर को उपवास करने का फैसला किया है। रविवार को आयोजित ‘तेलंगाना मार्च’ के दौरान पूरे हैदराबाद में तनाव की स्थिति बनी रही और कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई। उस्मानिया यूनिवर्सिटी में भी छात्रों को रैली में भाग लेने से रोके जाने पर काफी बवाल हुआ, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।
अलग राज्य की मांग को लेकर तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने रविवार को हुसैन सागर लेक के पास नेकलेस रोड़ पर तेलंगाना मार्च का आह्वान किया था। कथित तौर पर आदेश के खिलाफ सचिवालय की ओर जा रहे लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का सहारा लिया।
उस्मानिया यूनिवर्सिटी में छात्रों ने बैरीकेड तोड़ते हुए पुलिस पर पथराव किए, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और कुछ छात्रों को हिरासत में ले लिया। छात्र चाहते थे कि उन्हें ‘तेलंगाना मार्च’ में शामिल होने की अनुमति मिले, लेकिन सरकार ने शनिवार को उन्हें किसी भी प्रकार की रैली में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
सचिवालय के नजदीक ‘तेलुगु तल्ली’ फ्लाईओवर के पास तेलंगाना समर्थकों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया। रविंद्र भारती क्षेत्र में भी पुलिस और तेलंगाना समर्थकों के बीच झड़प हुई। सचिवालय के पास, आईमैक्स थिएडटर, खैरताबाद और नेकलेस रोड की ओर जा रहे कई रास्तों पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें भी की।
मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी से मिलने न देने के बाद धरने पर बैठे तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस सांसदों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सांसद मधु याशकी गौड़ ने पुलिस पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की अनुमति के बावजूद पुलिस ने लोगों को इस मार्च में शामिल नहीं होने दिया।
शहर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हुए थे और बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, आरएएफ और एपीएसपी की जगह तैनाती की गई थी। हिंसा की आशंका के चलते दक्षिण सेंट्रल रेलवे ने करीब 27 पैसेंजर ट्रेन रद्द कर दी थी जबकि एपीएसआरटीसी ने भी कई स्थानों पर अपनी सेवा बंद रखी।