इशरत जहां एनकाउंटर मामले में गुजरात सरकार और प्रदेश भाजपा की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। तहलका ने गुजरात के तत्कालीन गृह एवं कानून राज्य मंत्री, एडवोकेट जनरल और दूसरे शीर्ष अधिकारियों की बातचीत से जुड़े टेप जारी किए हैं।
इन टेप में ये लोग इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में कथित तौर पर इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि इसकी आगे की जांच की राह में कैसे अवरोध खड़े किए जाएं।
जून, 2004 में गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने अहमदाबाद के बाहरी हिस्से में मुंबई की कॉलेज स्टूडेंट इशरत और तीन अन्य लोगों को मार गिराया था। उनका दावा था कि ये चारों लश्कर-ए-तय्यबा के आतंकी थे, जो मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के मिशन पर थे।
बैठक की यह बातचीत आईपीएस अधिकारी जी एल सिंघल ने कथित तौर पर रिकॉर्ड की थी, जिन्होंने सीबीआई को ये टेप सौंप दिए हैं। सिंघल को सीबीआई ने इसी मामले में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर है।
यह बैठक 19 नवंबर, 2011 को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में हुई। इसके कुछ दिन बाद ही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट गुजरात उच्च न्यायालय को सौंपी थी।
टेप में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री प्रफुल्ल पटेल कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, 'मैंने सतीश वर्मा को अपने घर बुलाया था...इसके खतरों को जानने के बावजूद मैंने चार घंटे से ज्यादा वक्त तक बातचीत की और उससे उन 18 लोगों की मदद करने को कहा, जो इस मामले में शामिल थे।'