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ग्रामीण भारत में शिक्षा की अलख जगाएंगे टाटा-अंबानी

Wed, 17 Oct 2012 08:33 AM IST
बृजेश सिंह/नई दिल्ली
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देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के लिए प्रसिद्ध उद्यमी मुकेश अंबानी, रतन टाटा समेत कई कारपोरेट घराने स्कूल खोलेंगे। ये स्कूल सरकार के साथ मिलकर खोले जाएंगे। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के अनुरोध पर इन कारपोरेट घरानों ने ब्लाक स्तर पर छठी से बारहवीं तक की शिक्षा के लिए पीपीपी मॉडल पर राष्ट्रीय आदर्श विद्यालय खोलने पर सहमति जताई है।
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सिब्बल ने देश के शीर्ष 100 कारपोरेट घरानों को पत्र लिखकर उनसे पीपीपी मॉडल के तहत ब्लाक स्तर पर राष्ट्रीय आदर्श विद्यालय स्थापित करने में सहयोग मांगा था। अमर उजाला के पास उपलब्ध सिब्बल के पत्र के अनुसार, उन्होंने सितंबर में विभिन्न घरानों के प्रमुखों से निजी तौर पर अनुरोध किया था कि देश में आरटीई लागू होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के लिए माध्यमिक स्कूलों की आवश्यकता होगी।

इसके लिए सरकार ने पीपीपी मॉडल के तहत देश में 2,500 सेकेंडरी स्कूल स्थापित करने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत खुलने वाले स्कूलों को सरकार केंद्रीय विद्यालय के एक हजार बच्चों की ट्यूशन फीस के बराबर प्रत्येक स्कूल को हर महीने वित्तीय मदद प्रदान करेगी।
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पीपीपी मॉडल के तहत खोले गए स्कूलों में अधिकतम 2,500 बच्चों को प्रवेश दिया जा सकेगा। इन स्कूलों में किए जाने वाले निवेश को कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के रूप में भी सरकार मान्यता प्रदान करेगी। अभी तक निजी क्षेत्र द्वारा खोले जाने वाले स्कूलों को सीएसआर के तहत मान्यता नहीं मिली हुई है। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 500 तथा अगले दो सालों में एक-एक हजार केंद्रीय आदर्श विद्यालय पीपीपी मॉडल के तहत स्थापित करने का फैसला किया है।

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, अब तक 50 से ज्यादा उद्यमियों के जवाब मंत्रालय को मिले हैं, जिनमें से ज्यादातर ने इस योजना में शामिल होने में रुचि दिखाई है। इनमें मुकेश अंबानी व रतन टाटा के अतिरिक्त राकेश भारती मित्तल, जिंदल ग्रुप के अध्यक्ष सज्जन जिंदल और आरटीसी ग्रुप का नाम प्रमुख है। साफ्टवेयर कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी तथा बजाज ग्रुप के राहुल बजाज ने इस योजना में शामिल होने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि वे पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे बड़े प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं।
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