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तेजपाल कांड मीडिया के लिए परीक्षा : बरखा दत्त

Mon, 25 Nov 2013 05:03 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक की किताब का विमोचन करने पहुंची पत्रकार बरखा दत्त का कहना है कि तरुण तेजपाल कांड मीडिया के लिए एक परीक्षा है।
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यह परीक्षा मीडिया को पास करनी होगी। जब आसाराम का स्कैंडल सामने आया तो मीडिया ने बहुत कवरेज की। जब सुप्रीम कोर्ट के जज पर आरोप लगे तो मीडिया ने खूब कवरेज की।

दिल्ली गैंगरेप हो या फिर मुंबई में महिला पत्रकार से गैंगरेप का मामला। सभी मीडिया हाउस ने इन मामलों में बेहतरीन कवरेज की।

अब जब एक मैग्जीन के संपादक का मामला सामने आया है तो इसमें भी मीडिया को अपने कवरेज में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए।

दोषी चाहे कोई भी हो, यह एक महिला से जुड़ा मामला है। इसमें कोई भी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसा वक्त है जब मीडिया हाउस को भी अपनी सोच बदलनी होगी।
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अब भी देखा जाता है कि स्टोरी असाइनमेंट की बात होती है तो कुछ एडिटर पहले ही सोच लेते हैं कि यह युवती है, इसलिए उसे यह टास्क न दिया जाए, लेकिन अब यह सोच बदलनी होगी।

विमोचन के दौरान बरखा दत्त ने वीपी मलिक से बुक के बारे में बातचीत की और उस दौरान के राजनेता व आर्मी के बीच रिश्तों के पीछे सच्चाई को जानने की कोशिश की।

बुक के रुपये दान किए जाएंगे
जरनल वीपी मलिक की बुक इंडिया मिलेट्री कॉनफ्लिक्ट एंड डिप्लोमेसी की बिक्री पर जो भी पैसा आएगा, उसे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की भलाई के लिए दिए जाएंगे।

यह जानकारी मलिक की पत्नी ने विमोचन के मौके पर दी। उन्होंने इस मौके पर बताया कि जनरल साहब बहुत बिजी रहते हैं। एक महीने में 12-15 दिन उनके ट्रेवलिंग में बीतते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी किताब लिखने में कामयाब रहे।
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उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अब मुझे इस बात की उम्मीद है कि जनरल साहब अब थोड़े रिलेक्स होंगे और घर में कुछ खाली समय बिताएंगे।

नेशन सिक्योरिटी मेकिंग पालिसी की हालत दयनीय
वीपी मलिक ने बताया कि नेशन सिक्योरिटी मेकिंग पालिसी की हालत बहुत ही दयनीय है। खुफिया विभाग की लगातार विफलता सामने आ रही है।

पालिसी बनाते समय आर्मी से बिल्कुल भी राय नहीं ली जा रही है। नेता व अफसर दोनों ही आर्म्ड फोर्सेस की जमीनी हकीकत को जानते नहीं है।

इसलिए आर्मी की ग्रोथ नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि किताब में उन मुद्दों को हाईलाइट करने की कोशिश की गई है, जिनके बारे में न तो पब्लिक जानती है और न ही राजनेता व अफसर।




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