प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नई पहल करते हुए सभी विभागों के सचिवों को सीधे उनके संपर्क में रहने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा है कि समस्याओं के समाधान और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए वे सीधे उनसे बात कर सकते हैं।
विज्ञापन
मंत्रियों की गैरमौजूदगी में सभी सचिवों के साथ बैठक कर मोदी ने साफ संदेश भी दे दिया कि उनकी सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया में नौकरशाहों की अहम भूमिका रहेगी।
सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और सुशासन पर लगातार जोर दे रहे मोदी ने बुधवार को सात रेसकोर्स में विभिन्न विभागों के 77 सचिवों के साथ लंबी बैठक की। यह पहला मौका है, जब किसी प्रधानमंत्री ने मंत्रियों की गैरमौजूदगी में सभी सचिवों से सीधे बात की है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि आप किसी भी समस्या को सुलझाने में मेरी मदद मांगने के लिए मुझे सीधे फोन या ई-मेल कर सकते हैं और इसी तरह किसी मुद्दे पर अपने सुझाव भी मुझे दे सकते हैं। प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों का मनोबल बढ़ाते हुए और उन पर पूरा भरोसा जताते हुए यह भी कहा कि आप फैसले लें, मैं आपके साथ हूं।
'पुराने नियम कायदों को दे छोड़'
मोदी ने शीर्ष अफसरों से कहा कि वे ऐसे पुराने नियम कायदों को छोड़ दें, जिनसे सरकारी कामकाज में बाधा आती है और भ्रम पैदा होता है।
ढाई घंटे की बैठक में मोदी ने नौकरशाहों की बात पूरे ध्यान से सुनी और उनकी इस राय से सहानुभूति भी जाहिर की कि वे परिस्थितियों की वजह से अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते हैं।
प्रधानमंत्री ने सचिवों से प्रशासनिक नियमों-प्रक्रियाओं को सरल और पीपुल फ्रेंडली बनाने के लिए भी कहा। सूत्रों के अनुसार बैठक में कुछ मंत्रालयों के सचिवों ने अपने प्रजेंटेशन भी दिए।
मालूम हो कि मोदी अपने मंत्रियों से पहले ही कह चुके हैं कि वे अगले 100 दिनों का एजेंडा तैयार करें। सचिवों के साथ मोदी की यह बैठक पहले मंगलवार को होनी थी, लेकिन ग्रामीण विकास मंत्री गापीनाथ मुंडे के सड़क हादसे में निधन के चलते इसे बुधवार के लिए टाल दिया गया था।
सचिवों को सलाह
कामकाज में बाधा बन रहे पुराने नियम कायदों को छोड़ें असरदार और सटीक काम के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें लोगों की समस्याएं दूर करने में सूचना तकनीक के प्रयोग पर जोर दें एकजुट होकर काम करें और अपनी टीम की अगुवाई करें
नई पहल यह पहली बार है, जब किसी प्रधानमंत्री ने मंत्रियों की गैरमौजूदगी में सचिवों के साथ सीधे संवाद किया। बैठक में हिस्सा लेने वाले 77 शीर्ष अफसरों में वित्त सचिव अरविंद मायाराम, गृह सचिव अनिल गोस्वामी, रक्षा सचिव राधाकृष्ण माथुर और विदेश सचिव सुजाता सिंह भी शामिल रहीं।
इस बैठक के लिए मंत्रालयों को 16 समूहों, मसलन वित्त, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, कृषि आदि में बांटा गया था। वित्त मंत्रालय से संबंधित सभी विभागों के सचिवों को एक समूह में रखा गया।
ऊर्जा और उससे जुड़े विभागों कोयला, तेल, खदान और परमाणु ऊर्जा को एक समूह में, जबकि कृषि और उससे संबंधित विभागों को एक समूह में रखा गया। ढांचागत क्षेत्र से जुड़े विभागों रेलवे, टेलीकॉम, सड़क, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी और बंदरगाह विभाग को एक समूह में रखा गया। हर समूह ने प्रधानमंत्री के समक्ष अपने प्रजेंटेशन दिया।
पीएम ने मांगा था 10 स्लाइड प्रेजेंटेशन प्रधानमंत्री ने हाल में सचिवों से 10 स्लाइड प्रजेंटेशन देने को कहा था, जिसमें उनसे पिछली सरकार के कामयाबियों और नाकामियों का ब्योरा देने के लिए कहा गया था। इसके अलावा अगले पांच साल के लिए उनकी क्या योजनाएं हैं, यह भी पूछा गया था।