देश-विदेश में अपनी खास पहचान के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल के रॉयल गेट की हालत खराब है। इस गेट से पानी का रिसाव हो रहा है, जो इमारत तक पहुंच रहा है।
इससे साथ ही स्मारक के कई हिस्से टूटफूट गए हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने अब इसकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। मरम्मत कार्य में चार से पांच माह का समय लग सकता है।
ताजमहल के मुख्य प्रवेश द्वार को रॉयल गेट के नाम से जाना जाता है। इतिहासकारों की मानें तो शाहजहां इसी द्वार का इस्तेमाल ताजमहल जाने के लिए करते थे।
रॉयल गेट में वर्ष 2003 में संरक्षण का कार्य किया गया था। तब इमारत के दक्षिण तरफ का प्लास्टर (इल्ले) झड़ गया था। इमारत के कुछ पत्थरों की परतें निकलने लगी थीं।
एक बार फिर इमारत की मरम्मत के मद्देनजर एएसआई ने काम शुरू किया है। इस बार उत्तर दिशा में लगे लाल पत्थर की परतें टूट रही हैं। वहीं जगह-जगह प्रयुक्त प्लास्टर (इल्ले) भी झड़ रहा है।
इस वक्त सबसे बड़ी चिंता का कारण गेट की छत से इमारत में पानी के प्रवेश को लेकर है। इसकी वजह से पैनल गल गया है। छत की मुंडेर भी जगह-जगह टूट गई है।
एएसआई ने इसे गंभीरता से लिया है ताकि ताजमहल के रॉयल गेट और इमारत को किसी प्रकार का नुकसान न हो। यही कुछ स्थिति ताजमहल के मेहमान खाने की पूर्वी दीवार की है। वहां भी संरक्षण की दरकार को देखते हुए एएसआई ने तेजी से कार्य शुरू करा दिया है।