ताजमहल में सेंट्रल टैंक की जिस डायना सीट पर बैठकर दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और अभिनेता फोटो खिंचवाते रहे हैं, वहां दीमक ने अपना घर बना लिया है। संगमरमर की इस बेंच के जोड़ भी खुल चुके हैं। संगमरमर की सीढ़ियों पर लकड़ी का कवच बनाने और लकड़ी के ही रैंप प्रयोग करने से दीमक बढ़ती जा रही है।
सेंट्रल टैंक पर बनी बेंच और उस पर पहुंचने के लिए लगाई गई लकड़ी की सीढ़ियों पर भी दीमक है। यह दीमक बेंच के सभी जोड़ों में भर चुकी है। तीन साल पहले ताजमहल की नींव में दीमक लगने का पता चला था। तब दीमकरोधी ट्रीटमेंट किया गया था, लेकिन ताज के संरक्षण में लापरवाही अब फिर सामने आई है।
2007 में सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) ने ताजमहल की आंतरिक संरचना की जांच की थी, जिसकी रिपोर्ट एएसआई को सौंपी गई। इसमें ताजमहल की फाउंडेशन की जांच के लिए 25 मीटर गहरी व 50 मिलीमीटर चौड़ी बोरिंग करने, पूरे स्मारक की लेजर स्कैनिंग, छोटे से छोटे बदलाव की पहचान, दीवारों पर एंटी टर्माइट ट्रीटमेंट, मुख्य गुंबद के नीचे आई दरार को भरने और मीनारों से चमगादड़ों को भगाने की व्यवस्था करने की संस्तुति की गई थी।