फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EXCLUSIVE: कमांडो ने पहनाए शिवपाल को जूते

Mon, 04 Aug 2014 03:49 PM IST
शशांक मिश्र/अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
लाख तुक्का-फजीहतों के बाद भी सपा सरकार में चापलूसी बंद होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा उदाहरण रविवार को सहारनपुर पहुंचे कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव और उनकी सुरक्षा में तैनात कमांडो का है। गुरुद्वारे में सिख समाज के लोगों से मुलाकात के दौरान सुरक्षाकर्मी सीढ़ियों के पास उनके जूते लेकर खड़ा रहा और उनके नीचे उतर कर आने पर उसने भीड़ के बीच ही लोक निर्माण मंत्री को जूते पहनाए।
विज्ञापन


दंगे की जांच के लिए सहारनपुर पहुंचे केबिनेट मंत्री शिवपाल यादव को उनकी सुरक्षा में तैनात कमांडो ने जूते पहनाकर चापलूसी की पराकाष्ठा ही पार कर दी। उसने बाकायदा मंत्री के जूते उठाए रखे और उनके आने का इंतजार करता रहा। करीब 10 मिनट बाद गुरुद्वारे के सभागार से नीचे उतरे मंत्री की ओर लपक कर सुरक्षाकर्मी ने उन्हें जूते पहनाए। इस दौरान वहां मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मी भी थे और कुछ को यह चापलूसी नागवार भी गुजर रही थी।

पहले भी कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की चापलूसी सुर्खियों में रही है। करीब डेढ़ साल पहले इटावा में पीपीएस अधिकारी ऋषिपाल यादव ने सरेआम उनके पैर छुए थे। उसकी तैनाती अभी भी इटावा में बरकरार है। बता दें कि राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों के बीच चापलूसी का नाता काफी पुराना है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी अधिकारियों से जूता साफ करवाने और पहनाने को लेकर सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आईएएस अधिकारी विजय राघव पंत की कहानी भी एक समय चर्चित रही थी। हालांकि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव सार्वजनिक रूप से चापलूसी पर तंज कस चुके हैं। बावजूद इसके रविवार को गुरुद्वारा परिसर में सामने आई जूते पहनाने की इस घटना ने सपा में फिर चापलूसी को उजागर किया है।
विज्ञापन

सहारनपुर दंगे के पीडितों को अधिक से अधिक मुआवजा

लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यदि दंगे के मामले में अफसर दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ भी जरूर कार्रवाई होगी। इसके लिए शासन के पास पहुंची रिपोर्टों और दंगा पीड़ितों की सुनवाई करने के बाद तथ्यों की जांच कर फैसला किया जाएगा।

रविवार को सर्किट हाउस में दंगा पीड़ितों का दर्द सुनने पहुंचे शिवपाल यादव ने दावा किया कि सभी समाज के पीड़ितों का हाल जानने के बाद उन्हें अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि दंगे की आंच में किसी निर्दोष को नहीं फंसने दिया जाएगा। जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तेज होगी। दंगे में पकड़े गए मास्टरमाइंड मोहर्रम अली के फोटो और उसके पालीटिकल कनेक्शन पर मंत्री ने कहा कि इससे जुड़े तथ्यों की भी जांच करवाई जा रही है। सहारनपुर में हुए दंगे के पीछे कोई सुनियोजित और सियासी साजिश थी? इस सवाल को भी शिवपाल सिर्फ इतना कहकर टाल गए कि तथ्यों की जांच के बाद ही सही स्थिति सामने आएगी। जल्दी ही इससे पर्दा उठ जाएगा।

जिस विवादित स्थल को लेकर दंगा हुआ? उसके बारे में सरकार क्या निर्णय लेगी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि पहले दंगा पीड़ितों का दर्द सुनना जरूरी है। उन्हें राहत के बाद ही इस स्थल के सभी बिंदुओं की जांच कर कोई कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समय इस विवाद से ज्यादा सांप्रदायिक सौहार्द बनाने की जरूरत है। सरकार की भी यही मंशा है। कहा, दंगे में दुकानों और वाहनों को क्षतिग्रस्त किए जाने की जांच चल रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रदेश सरकार अधिक से अधिक आर्थिक सहायता देगी। सहारनपुर पहुंचने वाले डेलीगेशन में शिवपाल यादव के अलावा कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरविंद सिंह गोप, युवा कल्याण परिषद के अध्यक्ष आशु मलिक और मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष हाजी इकराम कुरैशी शामिल थे।

'प्रशासन चाहता तो नहीं होती लूट और आगजनी'

दंगा पीड़ितों ने मंत्रियों को अफसरों के सामने ही लापरवाही गिनाई। गुरुद्वारा, सर्किट हाउस और शहर काजी के घर पर अफसरों की लापरवाही की पोल उनके सामने ही खोली गई। आलम यह रहा कि गुरुद्वारा में डीएम और एसएसपी सिर झुकाए बैठे रहे। जबकि सर्किट हाउस में अधिकारी पसीना-पसीना रहे।

पीड़ितों ने साफ किया कि प्रशासन की लापरवाही के चलते ही लूट और आगजनी हुई है।

पीड़ितों ने किया कि दंगा भड़कने के बाद जिलाधिकारी ने कर्फ्यू लगाने में बहुत देर की। कर्फ्यू लगने के बाद सही तरीके से उसे आगे तक नहीं बताया गया। इस बीच दंगाइयों ने जमकर लूटपाट की। रोकने की गुजारिश की तो अधिकारी बोले हमें ऊपर से आदेश नहीं हैं।

मंत्रियों ने न जलीं दुकानें देखीं और न घटनास्थल

दंगा पीड़ितों का हाल जानने रविवार को सहारनपुर पहुंचे मंत्रियों के जांच दल की खूब फजीहत हुई। प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते पूरे दिन अफरातफरी बनी रही। मंत्रियों का दौरा अफसरों की लापरवाही से हंगामे की भेंट चढ़ गया। उधर, जांच दल भी महज खानापूर्ति कर लौट गया। जांच समिति ने न तो घटनास्थल का मुआयना किया और न ही अंबाला रोड की जलीं दुकानों का ही निरीक्षण किया। सिर्फ लोगों से बात और मुलाकात ही की।

रविवार सुबह करीब 11 बजे लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव के नेतृत्व में मंत्री शिवकांत ओझा, अरविंद सिंह गोप, आशु मलिक और मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष इकराम कुरैशी जांच के लिए पहुंचे। गुरुद्वारे पर शांतिपूर्ण तरीक से बातचीत के बाद उनका आगे का दौरा हंगामे की भेंट चढ़ गया। प्रशासनिक अव्यवस्था का आलम यह रहा है कि मंत्रियों को न तो घटनास्थल का मुआयना कराया गया और न ही राख हो चुकीं दुकानें दिखाई गईं। दरअसल, दिल्ली से सहारनपुर पहुंचे जांच दल का कार्यक्रम एयरपोर्ट से आगे का तय नहीं था। अधिकारियों ने उन्हें गुरुद्वारे पर रोका और वहां पीड़ितों ने अपनी बात रखी। चंद कदमों की दूरी पर स्थित मस्जिद में उन्हें ले जाने की मांग उठी, कुछ लोगों ने सर्किट हाउस चलने की सलाह दे दी। यहां कुछ लोगों ने मंत्रियों पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए वार्ता का बहिष्कार कर दिया।

सर्किट हाउस में हंगामे के बाद दल का एकाएक शहर काजी के घर चलने का निर्णय हुआ। इसके बाद शहर काजी नदीम अख्तर के घर पर अधिकारियों का रेला पहुंचा,  मगर इस बीच शहर में सरकार की फजीहत होती रही। हंगामे के चलते मंत्रियों तक पीड़ितों की बात तक नहीं पहुंच पाई। जाते समय शिवपाल यादव ने जिला प्रवक्ता फैसल सलमानी से बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। पूर्व सभासद मंसूर बदर ने 11 सूत्री मांगपत्र दिया और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाने की मांग की।
विज्ञापन

कर्फ्यू में 12 घंटे ढील पटरी पर लौटा शहर

दंगे के नौवें दिन शहर अमन की राह पर लौटा। रविवार को कर्फ्यू में 12 घंटे की ढील में सड़कों से लेकर बाजार तक दंगे से पहले की तरह चहल-पहल रही। गांवों से भी लोगों के कदम शहर की ओर बढ़े। बाजार में अधिकांश दुकानें खुलीं और लोगों ने जमकर खरीददारी की। प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों में फोर्स तैनात रखी। उधर, कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व में रविवार को सहारनपुर पहुंचे मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल ने दंगा पीड़ितों का दर्द सुना और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

पीसीएस (प्री) परीक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने दंगे के बाद पहली बार रविवार को कर्फ्यू में सुबह सात से शाम सात बजे तक की ढील दी। एक हफ्ते बाद शहर के लोग सुबह उठकर टहलने निकले। कंपनी बाग और अन्य पार्कोँ में भीड़ रही। पीसीएस परीक्षा के लिए रेलवे स्टेशन पर सबसे ज्यादा भीड़ दिखी। प्रशासन ने परीक्षार्थियों को सेंटर तक ले जाने के लिए बसें लगाई हुई थीं। दस बजते ही शहर के बाजार खुल गए। रोजमर्रा की जरूरत और दुकानों का सामान लेने वालों की अधिक भीड़ रही। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग बाजार पहुंचे और खरीददारी की।

इसी दौरान करीब 11 बजे पहुंचे कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के नेतृत्व में मंत्रियों के दल से सिख समुदाय से मिला। इसके बाद सर्किट हाउस में मुस्लिम पक्ष से बातचीत की। दोषी अफसरों पर कार्रवाई और पीड़ितों को आर्थिक सहायता का आश्वासन देकर प्रतिनिधिमंडल लौट गया। शाम तक शहर के हालात पूरी तरह सामान्य रहे। डीएम संध्या तिवारी ने बताया कि शहर का माहौल शांत हो रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस फोर्स तैनात रहेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें