विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने संबंधी बयान पर महाभारत छिड़ गई है।
विपक्षी दलों के साथ ही राजग की सहयोगी पीएमके ने भी सख्त ऐतराज जताया है। इन दलों ने स्वराज के बयान को अनुचित करार देते हुए कहा है कि सरकार को सभी धर्मों के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए। हालांकि विदेश मंत्री का पक्ष लेते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि उनके बयान में कुछ भी गलत नहीं है।
सुषमा ने रविवार को कहा था कि भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की केवल औपचारिकता बाकी है। उनके इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने तीखी आलोचना की है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सवाल किया कि बहु आस्था वाले देश में एक पवित्र किताब दूसरी की तुलना में ज्यादा पवित्र कैसे हो सकती है।