सांप्रदायिक हिंसा और पंजाब सहित कुछ राज्यों में आतंकवाद फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सरकार ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और सुरक्षा संस्थाओं के प्रमुखों को इस गंभीर खतरे के प्रति आगाह करते हुए इस पर पैनी नजर रखने की जरूरत पर जोर दिया।
आतंकवाद के खतरों का जिक्र करते हुए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) को पाकिस्तान से हर तरह की मदद मिल रही है। हालांकि शिंदे ने संतोष जताया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव और जम्मू-कश्मीर के पंचायत चुनाव में जनता ने भारी संख्या में वोट देकर नक्सलवाद और आतंकवाद को करारा जवाब दिया है।
दिल्ली में गृहमंत्रालय और खुफिया एजेंसी आईबी की रहनुमाई में आयोजित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस संस्थाओं के प्रमुखों के तीन दिवसीय सम्मेलन का आगाज करते हुए शिंदे ने कहा कि सरकार जनता के अभिव्यक्ति के अधिकार का पूरा समर्थन करती है। लेकिन साइबर दुनिया के गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाना जरूरी हो गया है।
शिंदे ने मुजफ्फरनगर दंगे का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सांप्रदायिक तनावों के लिए भड़काने वाले संदेश और वीडियो क्लिप जिम्मेदार हैं। सम्मेलन में सोशल मीडिया को अलग के चर्चा का विषय बनाया गया है।
शिंदे ने जटिल आंतरिक सुरक्षा के हालात को उजागर करते हुए कहा कि बीते सितंबर में पंजाब के कुछ नौजवानों ने फेसबुक पर 1984 सिख दंगे की भड़काऊ कहानी डालनी शुरू कर दी थी। उन संदेशों में सिखों पर जुल्म करने वाले और दंगे को आरोपी नेताओं की हत्या के लिए एकजुट होने का आह्वान था।
शिंदे के मुताबिक पंजाब पुलिस के सजग रहने की वजह से इसे शुरू में ही दबा दिया गया। इसी तरह उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कई घटनाएं सामने आयी हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि देश में कई धमाकों को अंजाम देने वाले आईएम को पाकिस्तान की ओर से लगातार वित्तीय और सामरिक मदद मिल रही है। आईएम को आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ खतरा बताते हुए शिंदे ने मास्टर माइंड यासीन भटकल और अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी पर सुरक्षा एजेंसियों को बधाई दी।