गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के मामले पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते हैं। शिंदे ने सोमवार को कहा कि वह गुरू की दया याचिका पर संसद के शीत सत्र के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में मंत्रालय गुरू की फांसी की क्षमा याचिका को खारिज करने की राष्ट्रपति से सिफारिश कर चुका है।
लेकिन शिंदे के पदभार संभालने के बाद परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति ने गुरू की फाइल एक बार फिर गृह मंत्रालय को भेज दी है। शिंदे ने इस बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि उनका स्वभाव दूसरों से अलग है। वह इस मामले में फैसला लेने में न तो कोई जल्दबाजी करेंगे और न ही किसी निश्चित तारीख का वादा करेंगे।
उन्होंने बताया कि गुरू के मामले के साथ राष्ट्रपति ने सात और क्षमा याचिकाओं की फाइल उनके पास भेजी है। लोकसभा में सदन के नेता होने की वजह से उनकी व्यस्तता ज्यादा है। लिहाजा इस सत्र के बाद ही इन मामलों में फैसला लिया जाएगा। संसद का शीत कालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले में सुरक्षा कर्मियों समेत नौ लोग मारे गए थे और 16 लोग घायल हो गए थे।