विदेशियों के लिए भारत में किराए की कोख लेने पर रोक लग सकती है। अगर स्वास्थ्य सेवाएं, महानिदेशालय (डीजीएचएस) की सलाह को स्वास्थ्य मंत्रालय मान लेता है तो विदेशी जोड़ों के लिए सेरोगेट मदर मिलना मुश्किल हो जाएगा।
डीजीएचएस की स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी सलाह के अनुसार केवल भारतीय मूल के शादीशुदा और निसंतान जोड़े को ही सेरोगेसी (किराए की कोख) का इस्तेमाल करने की अनुमति होनी चाहिए।
सेरोगेसी के मामलों में सामने आ रहीं अनियमितताओं और सेरोगेट मांओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर रोक के लिए ये सलाह डीजीएचएस डॉ. जगदीश प्रसाद ने भेजी हैं। डीजीएचएस, स्वास्थ्य मंत्रालय की ही एक इकाई है।
डीजीएचएस की सलाह में यह भी कहा गया है कि विदेशी जोड़ों में एक व्यक्ति भारतीय मूल को होना जरूरी है और कोई महिला जीवन में केवल एक ही बार सेरोगेट मां बन सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय सेरोगेसी उद्योग का नियमन करने वाले सहायक प्रजनन प्रौद्यौगिकी बिल पर काम कर रहा है। पांच साल से तैयार हो रहे इस बिल के लिए गैरसरकारी संगठनों से परामर्श लेने के मुद्दे पर मंत्रालय का योजना आयोग से विवाद भी चल रहा है।
एक साल में जन्मे 2000 बच्चे
हाल ही में दिल्ली के एक गैरसरकारी संगठन के सेरोगेसी पर आए सर्वे के मुताबिक 40 प्रतिशत विदेशी भारत में सेरोगेसी का उपयोग करते हैं। हर साल भारत में सेरोगेसी से करीब 2000 बच्चे जन्म लेते हैं। सीआईआई के आंकड़ों के अनुसार सेरोगेसी का लगभग 140 अरब 50 करोड़ का देश में कारोबार है।
सर्वे के मुताबिक सेरोगेट मांओं को जबरदस्ती उनके घर से अलग हॉस्टल में रखा जाता है।
कुछ ऐसे भी मामले सामने आएं हैं कि जिनमें बच्चे के सफल प्रजनन को सुनिश्चित करने के लिए दो महिलाओं को गर्भधारण कराया जाता है। एक महिला से स्वस्थ बच्चा होने पर दूसरी महिला को बिना बताए गर्भपात करा दिया जाता है।
जोड़ा ही ले सकेगा बच्चा
योजना आयोग के सदस्य सैयद हमीद का कहना है कि 'समा' जैसी संस्थाएं इस क्षेत्र में काफी काम कर रही हैं और विशेषज्ञता रखती हैं। हमने एक छोटा समूह बनाने की योजना बनाई है जो बताएगा की हम सेरोगेसी के क्षेत्र की जानकारी बिल को प्रभावी बनाने के लिए किस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
डीजीएचएस ने यह भी कहा है कि केवल 25 से 35 साल की महिलाएं ही सेरोगेट मदर बन सकती हैं और उनके अपने दो से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। साथ ही केवल एक जोड़ा ही बच्चे के लिए सेरोगेसी का इस्तेमाल कर सकता है जबकि मूल बिल के अनुसार एक अकेला व्यक्ति भी इसका उपयोग कर सकता है।
हांलाकि, बिल की तैयारी देख रहे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक का कहना है कि उन्हें प्रसाद की सलाह अभी नहीं मिली है।