देश में समान नागरिक संहिता(यूनिफार्म सिविल कोड) लागू करने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अदालत संसद को कोई विशिष्ट कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती है। यह काम कानून निर्माताओं का काम है न कि अदालत का।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि समान नागरिक संहिता बनाने के लिए शीर्ष अदालत की टिप्पणी उम्मीद आधारित हो सकती है लेकिन इस संबंध में निर्देश सरकार ही जारी कर सकती है।
पीठ ने यह भी कहा कि उस व्यक्ति को अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए जिसकेसाथ पर्सनल लॉ केकारण उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो या भेदभाव हुआ हो। कोई दूसरे समुदाय या धर्म का व्यक्ति समान संहिता की गुहार नहीं कर सकता। पीठ ने कहा कि इस मसले पर कानून स्पष्ट है। हमारा मानना है कि इस तरह का निर्णय संसद को लेना चाहिए।