भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त नागरिक के मतदान के अधिकार को समाप्त किए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
संविधान के अनुच्छेद-326 को आधार बनाकर दायर की गई याचिका में सरकार को इस मसले पर कानून बनाने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका को एक अन्य मामले के साथ संबंध कर दिया है।
जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हरियाणा निवासी याचिकाकर्ता सतवीर ने कहा कि अनुच्छेद 326 में कहा गया है कि किसी भी कानून के तहत यदि व्यक्ति पागलपन, अनिवासी, भ्रष्टाचार और अपराध के दायरे में नहीं आता, तो उसे मतदान का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए कि भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त व्यक्ति से किस स्तर पर मतदान करने का अधिकार छीन लिया जाए। लेकिन सरकार ने जन प्रतिनिधित्व कानून में इस मसले पर कोई प्रावधान नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 मई को याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मसले पर निर्देश देना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह काम संसद का है जो इस मुद्दे पर विचार करके कानून बनाने में सक्षम है। पीठ ने कहा कि इस याचिका को लोक प्रहरी के मुद्दे के साथ संबंध किया जाता है, जिस पर अदालत 16 दिसंबर को सुनवाई करेगी।