सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकार द्वारा संशोधित रिप्ररजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट, जिसमें किसी भी नेता को पुलिस हिरासत या जेल में होने पर चुनाव लड़ने की छूट दी गई है, को मंजूरी दे दी है।
सरकार सहित सुषमा स्वराज ने दी मंजूरी
रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट, 2013 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में महज 15 मिनट के बहस के बाद पारित करवा लिया था। कुछ सांसद इसमें और बहस की मांग कर रहे थे लेकिन नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज सहित अधिकांश सांसद इसे पास कर देना चाहते थे। राज्यसभा में यह बिल 27 अगस्त को पास हो गया था।
यह बिल रिपरजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट के सेक्शन 62 के सब सेक्शन (2) में बदलाव करता है, जिसमें किसी भी वोटर को हिरासत में उसके अधिकार से अस्थायी रूप से वंचित करने का प्रावधान था।
इस संशोधन के बाद कोई भी व्यक्ति जो हिरासत या जेल में हो उसका नाम मतदाता सूची में बना रहेगा और वह चुनाव में नामांकान भी दाखिल कर सकता है।
इस संशोधन से पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि हिरासत या जेल में बंद कोई भी अपना मतदान तक नहीं कर सकता है।