सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के खिलाफ अन्ना द्रमुक सुप्रीमो जयललिता की तरफ से दायर आपराधिक मानहानि मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी है।
साथ ही न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की बेंच ने स्वामी की उस याचिका पर केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस भेजा है जिसमें आपराधिक मानहानि के प्रावधानों को दंडात्मक कार्यवाही संबंधी कानूनों से हटाने की बात कही गई है।
कोर्ट ने स्वामी के खिलाफ चेन्नई के सत्र न्यायालय में दायर मानहानि के सभी पांच मामलों की सुनवाई पर रोक लगा दी है। सोशल साइट पर जयललिता के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक आरोप लगाने के मामले में राज्य सरकार ने स्वामी के खिलाफ मानहानि के पांच मामले दर्ज किए थे।
अदालत ने कहा कि यदि जनता के किसी विचार, अनुभूति या आलोचना को किसी सरकार द्वारा आपराधिक मामला बनाकर दबाया अथवा खत्म किया जाता है तो यह परिपक्व लोकतंत्र के स्वस्थ विकास को प्रभावित करता है।
स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि आपराधिक मानहानि के प्रावधान असंवैधानिक हैं क्योंकि यह बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर रोक लगाता है। इसके साथ ही स्वामी ने आपराधिक मानहानि के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 और अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 199 (2) की वैधता को चुनौती दी।