दिल्ली गैंगरेप कांड के चश्मदीद गवाह के टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू को साक्ष्य के रूप में पेश करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
दिल्ली पुलिस की याचिका पर अदालत ने शुक्रवार को हाईकोर्ट के सात मार्च के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रतिपक्ष अभियुक्त को नोटिस जारी किया है।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन ने कहा कि आरोप-पत्र दायर होने के बाद इस तरह का साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किया जा सकता।
आईपीसी की धारा 228ए (3) के तहत अदालत की अनुमति के बिना दुष्कर्म के मामले से संबंधित खबर प्रकाशित या प्रसारित नहीं की जा सकती।
16/12 की वारदात की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन जनवरी को साकेत अदालत के मजिस्ट्रेट के समक्ष चार्जशीट दायर कर दी थी। उसके अगले ही दिन चार जनवरी को वारदात के चश्मदीद का इंटरव्यू एक न्यूज चैनल ने दिखाया।
अभियुक्त राम सिंह और उसके भाई मुकेश ने इंटरव्यू से संबंधित सीडी को साक्ष्य के रूप में पेश किया लेकिन फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आठ जनवरी को बचाव पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सात मार्च को अभियुक्तों की याचिका स्वीकार कर ली और सीडी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है।
गौरतलब है कि राम सिंह ने बाद में जेल में आत्महत्या कर ली थी। उसका भाई मुकेश भी हत्या और दुष्कर्म का अभियुक्त है। टीवी इंटरव्यू में चश्मदीद ने पुलिस पर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।
अभियुक्त इसका लाभ लेने की कोशिश में हैं। बचाव पक्ष चाहता है कि अगर सीडी को रिकॉर्ड का हिस्सा मान लिया जाए तो एकमात्र चश्मदीद से लंबी जिरह के बाद अभियोजन की कहानी को संदेह के घेरे में लाने में मदद मिलेगी।