सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) धर्मेंद्र सिंह को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
एसएसपी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट हाईकोर्ट के निर्देश पर निचली अदालत ने जारी किया था। सर्वोच्च अदालत ने एसएसपी के साथ सिंहानी गेट थानाध्यक्ष व अन्य के खिलाफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट पर भी रोक लगा दी है।
जस्टिस सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अभीष्ठ कुमार ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और पेश भी किया।
इसके बावजूद हाईकोर्ट की ओर से एसएसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा गया। जब एसएसपी ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की, तो हाईकोर्ट ने निचली अदालत को पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश होने का आदेश दे दिया।
साथ ही 23 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक को भी पेश होने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च अदालत की पीठ ने गिरफ्तारी से छूट देते हुए सभी को हाईकोर्ट में निर्धारित तारीखों पर पेश होने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के महेंद्र पाल की अपील पर सुनवाई के दौरान एसएसपी समेत अन्य को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था।
साथ ही यह भी कहा था कि यदि 30 सितंबर को मामले की सुनवाई कर रही बेंच नहीं बैठती तो अन्य खंडपीठ के समक्ष वह पेश हो सकते हैं।
याद रहे कि हाईकोर्ट ने एसएसपी व अन्य पुलिसकर्मियों को झूठा हलफनामा देने के मामले में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा था।
यह मुद्दा आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर उठा था, जिसमें पहले पुलिस ने बिना कोई गिरफ्तारी किए अदालत को सूचित किया कि अभियुक्त अमुक पते पर नहीं रहता। जबकि बाद में उसी पते से पुलिस ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी स्पष्ट की।