सरकारी खर्च पर मायावती और कांशीराम की मूर्ति बनाना कहां तक जायज है, इस सवाल का जवाब देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते का समय मांगा है। शीर्ष अदालत इस संबंध में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के अलग-अलग जगहों पर बनी इन मूर्तियों पर करोड़ों खर्च किए गए हैं।
चीफ जस्टिस एचएल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गौरव भाटिया ने याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते वक्त देने की गुहार की। पीठ ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने केलिए समय तो दे दिया लेकिन कहा कि इस तरह से सुनवाई को टालना उचित नहीं है।
याचिकाकर्ता रविकांत के मुताबिक मायावती, कांशीराम और पार्टी चुनाव चिह्न हाथी की बड़ी-बड़ी मूर्तियों को बनाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। इसमें लगे पैसे आम लोगों के हैं। लिहाजा सरकार को इस मद में खर्च करने का अधिकार नहीं है।