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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्टेटस सिंबल बन गई है सुरक्षा

Thu, 14 Feb 2013 11:25 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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वीआईपी लोगों को दी जा रही सुरक्षा के दुरुपयोग पर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख एक बार फिर सख्त दिखा। कड़ी नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि यह सुविधा लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बन गई है।
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कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से सार्वजनिक और निजी लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने के खर्च पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को भी कहा है। साथ ही यह बताने को भी कहा गया है कि सुरक्षा का उपभोग करने वालों में कितने लोगों पर आपराधिक आरोप हैं और उनकी सुरक्षा पर सरकारें कितना खर्च कर रही हैं।

सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों के बच्चों, पारिवारिक सदस्यों और उनके रिश्तेदारों को दी जा रही सुरक्षा पर भी कोर्ट ने जानकारी मांगी है। कोर्ट के अनुसार बड़े स्तर पर सरकारी धन को इस पर खर्च किया जा रहा है।
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जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एचएल गोखले की पीठ ने कहा कि संवैधानिक कार्यपालकों को छोड़कर सभी सरकारें सुरक्षा की सुविधा भोगने वाले लोगों पर किए जा रहे कुल खर्च के बारे में जवाब दाखिल करें। पीठ ने यह आदेश दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद अधिवक्ता हरीश साल्वे की ओर से दिए गए उदाहरणों पर जारी किया।

साल्वे ने पीठ को बताया कि किस तरह से सुरक्षा मुहैया कराने के प्रावधानों और गाड़ियों पर लालबत्ती का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह सुविधाएं नागरिकों की समानता के अधिकार के आड़े आ रही हैं।

पीठ के समक्ष साल्वे ने हाल में हुई उस घटना का हवाला भी दिया जिसमें रेलवे राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी के सुरक्षा गार्डों और उनके समर्थकों ने पश्चिम बंगाल, मुर्शीदाबाद के जिलाधिकारी के सरकारी आवास में घुसकर उत्पात मचाया था।

उन्होंने तमिलनाडु के हलफनामे का ब्योरा पेश करते हुए कहा कि अर्कोट के प्रिंस को सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, ताकि अंग्रेजों के जमाने जैसा उनका पुराना स्तर कायम रहे। ऐसा राजनीतिक कारणों से राज्य सरकार की ओर से किया गया है।

उन्होंने कहा कि मेरे घर के पास हरियाणा के मुख्यमंत्री के रिश्तेदार की सुरक्षा के लिए चौबीस घंटे पांच गाड़ियां खड़ी रहती हैं। भला एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य की सीमा में हथियारों के साथ कैसे घुस सकती हैं। यह एक परंपरा सी बन गई है।

पीठ ने साल्वे की उस दलील पर निजी लोगों को मुहैया कराई गई सुविधा का खर्च भी तलब किया जिसमें कहा गया है कि व्यवसायी विजय माल्या सहित तमाम निजी लोगों को भी सुरक्षा मुहैया कराई गई है। पीठ ने यह भी पूछा है कि निजी लोगों की सुरक्षा के खर्च का भार किस पर है। वह खुद वहन करते हैं या सरकारों पर ही इसका भार है।
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