वकालत करने से पहले ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन पास करने की अनिवार्यता का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि करीब 20 लाख वकीलों केबोझ तले दबे लीगल सिस्टम के लिए यह लाभदायक साबित हो सकता है।
इस अनिवार्यता को लेकर बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) पर सवाल उठाने केएक दिन बाद चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा है कि लीगल सिस्टम में सुधार की दरकार है। इस सिस्टम में प्रवेश का रास्ता आसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर किसी के पास लॉ की डिग्री है, उसे वकालत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने सवाल उठाया कि जब अपरिपक्व डॉक्टर नहीं होने चाहिए तो अपरिपक्व वकील क्यों होने चाहिए? पीठ ने कहा कि यह तो आग लगने पर कुआं खोदने वाली बात हुई। पीठ ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने केलिए कहा है।