कोई भी पुरुष अपनी पत्नी से महज इस आधार पर वैवाहिक रिश्ता नहीं तोड़ सकता कि वह घर छोड़कर चली गई थी। ऐसी स्थिति में पत्नी के लंबे अरसे तक घर नहीं लौटने को तलाक लेने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर की जिसमें पति ने अपनी पत्नी के लंबे समय से अलग रहने को तलाक लेने का आधार बताया था।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि एक पुरुष अपनी पत्नी से शारीरिक संबंध नहीं रखता और ऐसी स्थिति पैदा करता है कि पत्नी के पास घर छोड़कर अलग रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचे।
ऐसी स्थिति पति की ओर से तलाक लेने का आधार नहीं बनती। पीठ ने साथ ही स्पष्ट किया ऐसे मामलों में अलग रहने की अवधि भी तलाक देने के आधार पर विचार करने योग्य नहीं है।
अदालत का गलत फायदा नहीं मिल सकता
चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आप भले ही 30-40 साल से अलग रह रहे हैं। लेकिन शायद आपने ऐसी स्थितियों को पैदा किया हो।
जैसे कि आपने पत्नी से संबंध रखने ही बंद कर दिए हों। हम ऐसे तलाक के आदेश को दरकिनार कर देंगे। इस आधार पर किसी को तलाक नहीं दिया जा सकता। पीठ में शामिल जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस रोहिंगटन नारिमन ने कहा कि आप पत्नी से संबंध नहीं रखना चाहते, यह नहीं कह सकते।
या उसके साथ संबंध नहीं रखना चाहते और उसे जबरन साथ नहीं रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। ऐसे आधारों को अदालत के सामने रखकर तलाक नहीं मिल सकता। खुद गलत होने पर किसी और पर आरोप थोपने वाला अदालत से फायदा नहीं ले सकता।
65 साल की उम्र में तलाक का मामला
पति के वकील ने कहा कि उसने पहली पत्नी से तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली है और वह गुजारे भत्ते के मसले पर यहां आया है।
सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी 66 साल के उस आदमी की याचिका पर की, जिसने पहली पत्नी और दो लड़कियों के गुजारे भत्ते के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है।
जब उसकी ओर से धन के अभाव का हवाला दिया गया तो पीठ ने पूछा कि आपने दूसरी शादी कब की, तो जवाब आया कि 65 साल की उम्र में। तब पीठ ने कहा कि जो व्यक्ति इस उम्र में शादी कर रहा है, उसके पास धन का अभाव होने का सवाल ही नहीं। हालांकि बाद में पीठ ने मामले की सुनवाई को तकनीकी कारणों से टाल दिया।