सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार से पूछा है कि पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह पर हमला रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। साथ ही कोर्ट ने घायल आतंकी को पाकिस्तान वापस भेजने से साफ इंकार कर दिया।
जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि सनाउल्लाह पर जम्मू की कोट भलवाल जेल में हमले को रोकने के प्रयास क्यों नहीं किए गए।
जेल में बंद कैदी को सुरक्षा उपलब्ध कराने में नाकाम जेल अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
पीठ ने जेल के अंदर प्राणघातक हमले को एक गंभीर मामला बताया। हालांकि कैदी को पाकिस्तान वापस भेजने के आग्रह को ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि सनाउल्लाह को उम्रकैद की सजा मिली है और सजा में छूट का अधिकार सरकार को है।
जम्मू की कोट भलवाल जेल में गंभीर रूप से घायल आतंकी सनाउल्लाह को पाकिस्तान वापस भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि सनाउल्लाह 18 साल की जेल काट चुका है। उसने सजा पूरी कर ली है। वह फिलहाल चंडीगढ़ के पीजीआई में इलाज के लिए भर्ती है।
पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष भीम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि सनाउल्लाह 18 साल से जेल में है। उसे 1995 में गिरफ्तार किया गया था। वह जेल में एक अनुशासित कैदी के रूप में रहा है। वह पेशे से म्यूजिकल बैंड मास्टर है। उसने जेल में भी बैंड मास्टर का काम किया।
चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में भर्ती सनाउल्लाह को पाकिस्तान के सियालकोट भेजने का आग्रह किया गया है। याचिका में कहा गया है कि सनाउल्लाह के खिलाफ नौ मामले दर्ज हैं। इन सभी में वह अपनी सजा पूरी कर चुका है।
सजा पूरी कर चुके विदेशी नागरिकों को लेकर दायर याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने अगस्त 2012 में हलफनामा दायर किया था जिसमें अन्य विदेशी कैदियों के साथ-साथ पाकिस्तानी नागरिकों का भी जिक्र किया गया था। सनाउल्लाह पर टाडा के अलावा अन्य कई अपराधों के सिलसिले में मुकदमा चला।
गौरतलब है कि याचिका में कहा गया है कि जेल में 15 साल गुजार चुके विदेशी नागरिकों को रिहा कर दिया जाना चाहिए। सनाउल्लाह की तरह 12 अन्य कैदियों का विस्तृत विवरण अदालत में पेश किया गया है। इन सभी को जेल से रिहा करने का आग्रह किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि विदेशी नागरिकों के विचाराधीन मुकदमों को छह माह के अंदर निपटाने का निचली अदालत को आदेश दिया जाए। मानसिक रूप से अस्वस्थ कैदियों को भी छोड़ने का आदेश दिया गया है।
अमृतसर जेल में बंद पांच मूक बधिर कैदियों को उनके देश वापस भेजने के लिए अदालत को आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया है।