केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मसले पर हाईकोर्ट जाने को कहा है।
जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता एमएल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत कोई आदेश जारी नहीं करना चाहती।
याचिकाकर्ता इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। पीठ के समक्ष शर्मा ने तर्क दिया कि चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ और प्रचार के लिए केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा पर अध्यादेश लेकर आई है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।
अदालत को इसकी वैधता जांचनी चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अध्यादेश लाई है। हालांकि पीठ ने साफ किया कि अदालत इस आधार पर अध्यादेश की जांच नहीं कर सकती कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा छिपी हुई है।
सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता से अध्यादेश की वैधता को अन्य आधारों पर चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाने को कहा।
याद रहे कि याचिका में कहा गया था कि यूपीए सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए संविधान के अनुच्छेद 123 का दुरुपयोग किया है।
सिर्फ आपात स्थितियों में ही संविधान ने अध्यादेश जारी करने की अनुमति दी है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पांच जुलाई को खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस कानून के जरिए देश की दो तिहाई आबादी को प्रति माह एक से तीन रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर पांच किलोग्राम अनाज का अधिकार मिल जाएगा।