यूपी के ग्रेटर नोएडा के बिसरख जलालपुर समेत तीन गांवों में भूमि अधिग्रहण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को जमीन के कब्जे पर यथास्थिति कायम रखने का आदेश जारी कर दिया।
अब अगर जमीन पर भू-स्वामी का कब्जा है तो वह बरकरार रहेगा। साथ ही अधिग्रहीत जमीन पर कोई गतिविधि नहीं की जा सकेगी।
सर्वोच्च अदालत ने भू-स्वामियों की ओर से दायर आवेदन पर राज्य सरकार व प्राधिकरण से जवाब-तलब भी किया है।
जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता सतवीर की ओर से पेश अधिवक्ता संध्या गोस्वामी ने दलील दी कि तत्कालीन सरकार में ग्रेटर नोएडा के अधिकतर गांवों से जमीन अधिग्रहण आपात उपबंध के तहत किया गया।
यह कदम जायज नहीं था। ऐसे में अदालत से आग्रह है कि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं के निपटारे तक रोक लगाए।
इस पर पीठ ने बिसरख जलालपुर, रायपुर बांगर और डाबरा में अधिग्रहीत जमीन पर कब्जे में यथास्थिति कायम रखने का आदेश जारी किया।
याचिका के मुताबिक राज्य सरकार ने इस उपबंध का दुरुपयोग कर किसानों को अपना पक्ष रखने के अधिकार से वंचित किया। उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार ने महज अपने फायदे को ध्यान में रखते हुए किया।
भूमि अधिग्रहण कर बिल्डरों को बेच दी गई, लेकिन हाईकोर्ट ने अधिग्रहण के सभी मामलों में समान आदेश नहीं जारी किया, जो उचित नहीं है।
कुछ मामलों में आपात उपबंध के तहत अधिग्रहण की अधिसूचना को निरस्त किया गया है, जबकि अन्य में ऐसा न करते हुए मुआवजे को बढ़ाने का आदेश जारी किया गया है।
गोस्वामी के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश में एकरूपता नहीं है, जबकि सभी गांवों के किसानों ने आपात उपबंध के तहत जमीन अधिग्रहीत किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी।
उन्होंने तर्क दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औद्योगिक विकास के लिए शाहबेरी सहित कुछ अन्य गांव में आपात उपबंध के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना निरस्त कर दिया था, जबकि इसके बाद 21 अक्तूबर, 2011 को जारी फैसले में मुआवजे की रकम को 64.70 प्रतिशत बढ़ाने का आदेश जारी किया गया। साथ ही विकसित क्षेत्र में 10 प्रतिशत जमीन देने को भी कहा गया था।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पतवाड़ी गांव के भू-स्वामियों के आग्रह पर अधिग्रहीत की गई आबादी की भूमि पर यथास्थिति कायम रखने का आदेश जारी किया था।
बिसरख गांव के मामले में किसानों की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने पिछले वर्ष 27 अप्रैल को भी नोटिस जारी किया था।