सुप्रीम कोर्ट ने 218 कोयला खदानों के आवंटन को रद्द करने के मसले पर सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। खदान कंपनियों ने आवंटन रद्द करने का विरोध किया।
सर्वोच्च अदालत ने इन आवंटनों को गैरकानूनी करार दिया था। फैसले के बाद में केंद्र सरकार ने सभी आवंटन रद्द करने का समर्थन किया है। इसके विपरीत, खदानों के आवंटियों ने इसके लिए अनियमितताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रत्येक आवंटन पर गौर करने के लिए समिति गठित करने का अनुरोध किया।
कोल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, स्पांज आयरन मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन और इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और कुछ अन्य निजी व्यक्तियों ने 25 अगस्त के निर्णय के परिणामों पर गौर करने के लिए कमेटी गठित करने के विचार से केंद्र सरकार के सहमत नहीं होने का विरोध किया।
इन सभी ने कोयला खदानों का आवंटन रद्द करने के केंद्र सरकार के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पूरी तरह अनर्थ हो जाएगा। इससे बिजली संकट का सामना कर रही ग्रामीण आबादी ही प्रभावित होगी।