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सरकार को धिक्कार, सुप्रीम कोर्ट की जय-जय

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कालेधन के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट को 627 नाम सौंपे जाने के मसले पर आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसौदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास अब सभी नाम पहुंचने के बाद इन लोगों को सरकार का संरक्षण नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने कल एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था।
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सिसौदिया ने कहा कि इस सूची में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जिन्होंने राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया है। ये शर्मनाक है कि कोर्ट को सरकार के लिए नाम उजागर करने के लिए मजबूर करना पड़ा।

एनसीपी के नेता और जाने माने वकील माजिद मेनन ने कहा कि कालेधन के मामले में जो भी पहल हो रही है इसका सारा श्रेय सुप्रीम कोर्ट को जाता है क्योंकि सरकार का रवैया बहुत टालू रहा है। इस मामले में सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचती नजर आई है और सुप्रीम कोर्ट ही देश और लोकतंत्र की आखिरी आशा है।
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'आदेश मानना सरकार की मजबूरी'

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी का कहना है कि सरकार को पूरा कालाधन जब्त करना चाहिए और जैसा कि उन्होंने लोगों से वादा किया था, उसे लोगों के बीच बांट देना चाहिए। मनीष तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में कानूनी पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट की नजर है लेकिन इसमें एक सवाल सरकार की नैतिकता का भी है।

इस मामले में आप के पूर्व नेता और कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस संतोष हेगड़े ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस मामले सरकार के पास कोई विकल्प था। कोर्ट के आदेश को मानना सरकार की मजबूरी थी।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सरकार और बीजेपी दोनों की मंशा देश का कालाधन वापस लाना और खाताधारकों के नाम उजागर करना है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सभी नाम सौंपकर अपनी मंशा जाहिर भी कर दी है।

इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पाई का कहना है कि कालेधन के मामले में यह एक अच्छा कदम है लेकिन सरकार को यह कदम सत्ता में आते ही उठाना था। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं उठाया जिसकी वजह से सरकार के प्रति सुप्रीम कोर्ट ने अविश्वास व्यक्त किया।
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