क्या सिख को पंजाब में अल्पसंख्यक कहना जायज है? क्या अल्पसंख्यकों का दर्जा देश की जनसंख्या अनुपात के हिसाब से दिया जाना चाहिए या राज्यवार तरीके से? सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का परीक्षण करने का फैसला करते हुए मोदी सरकार का इस संबंध में नजरिया जानना चाहा है। शीर्ष अदालत ने साथ ही इस मसले पर अटॉर्नी जनरल से मदद मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ संख्या केआधार पर किसी समूह को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ का मानना है कि सिर्फ संख्या ही आधार नहीं होना चाहिए बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह समूह आर्थिक और सामाजिक तौर पर कितना संपन्न है। पीठ ने यह भी कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए नौकरी में उस समूह की कितनी भागीदारी है।
संविधान पीठ ने कहा कि कई समूह जो किसी राज्य में अल्पसंख्यक है लेकिन किसी राज्य में उनकी जनसंख्या अधिक है तो ऐसे राज्यों में भी उस समूह को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कहां तक जायज है। पीठ ने कहा कि सिखों को पंजाब में अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है। दिल्ली में भी सिखों को अल्पसंख्यक नहीं कहा जा सकता।
अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार होना चाहिए
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि हमारा मानना है कि सिर्फ संख्या
केआधार पर किसी समूह को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस
ने कहा कि क्या सिखों को पंजाब में, मुस्लिमों को जम्मू एवं कश्मीर में और
ईसाइयों को नागालैंड, मेघालय आदि राज्यों में अल्पसंख्यक कहा जाना चाहिए।
संविधान पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार
होना चाहिए न कि देश में उनकी जनसंख्या केआधार पर। संविधान पीठ शिरोमणि
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी(एसजीपीसी) सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर
रही है। याचिकाओं में पंजाब के शिक्षण संस्थानों में उन्हें अल्पसंख्यक का
दर्जा मिलना चाहिए।
पंजाब सरकार ने वर्ष 2001 और 2006 में अधिसूचना जारी कर
एसजीपीसी द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया
था। अधिसूचना में एसजीपीसी को शिक्षण संस्थानों में 50 फीसदी सीटें सिख
समुदाय केछात्रों के लिए आरक्षित रखने की इजाजत दी गई थी। हालांकि वर्ष
2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया
था।
शिक्षण संस्थानों में क्यों आरक्षण मिलना चाहिए?
हाईकोर्ट का कहना था सिखों को पंजाब में अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं
दिया जा सकता क्योंकि राज्य में सिख बहुमत में हैं। इस फैसले को एसजीपीसी
ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2008 में
हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को सुनवाई केदौरान संविधान
पीठ ने सवाल उठाया कि सिख छात्रों को पंजाब के शिक्षण संस्थानों में क्यों
आरक्षण मिलना चाहिए। पीठ ने कहा कि पंजाब में न तो सिखों की संख्या ही कम
है और न ही उनकी आर्थिक स्थिति ही खराब है।
पीठ ने अटॉर्नी जनरल को सरकार
का पक्ष बताने केलिए कहा है। साथ ही संविधान पीठ ने वरिष्ठ वकील टीआर
अंध्यार्जुन को अमाइकस क्यूरी(न्याय मित्र) नियुक्त किया है।