सुप्रीम कोर्ट ने असम में बेहतर बाढ़ प्रबंधन की विफलता पर राज्य सरकार और केंद्र से जवाब तलब किया है। इस कारण बड़े पैमाने पर भूक्षरण हुआ है। प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के लिए ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के निर्देश देने संबंधी याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ता प्रद्युत कुमार बोरा ने मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर, न्यायमूर्ति एस एस निज्जर तथा न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि असम सरकार द्वारा प्रभावी बाढ़ प्रबंधन नहीं करने के कारण कटाव की वजह से 2,358 वर्ग किलोमीटर भूक्षरण हुआ है।
कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को भी नोटिस भेजा है, जिसके संबंध में याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि ऊपर स्थित होने के बावजूद उसने बाढ़ से निपटने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि असम में ब्रह्मपुत्र घाटी की समस्याओं को सुलझाने के लिए ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम, 1980 के प्रावधानों को अब तक लागू नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील पी निप रेड्डी ने कहा कि बाढ़ के कारण एक वर्ष में कम से कम 600 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। योजना आयोग ने भी असम की गरीबी के लिए वहां हर साल आने वाली बाढ़ को जिम्मेदार ठहराया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए अटार्नी जनरल गुलाम ई वाहनवती से इस मामले में सहयोग की अपेक्षा की है।