सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन पर सरकार को 440 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सीबीआई और भारत संचार निगम (बीएसएनएल) को नोटिस जारी किया है।
मारन पर आरोप लगा है कि उन्होंने मंत्री रहते हुए चेन्नई स्थित अपने निवास में बीएसएनएल का टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित कराया। मारन ने 323 लाइन का दूरभाष केंद्र और डेटा लाइन अपने स्वामित्व वाली सन टीवी कंपनी को मुहैया कराई। इससे सरकार को नुकसान हुआ।
जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने पत्रकार स्वामीनाथन गुरुमूर्ति की याचिका पर सीबीआई और बीएसएनएल से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई ने प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जांच की पर मामले को अदालत तक ले जाने के लिए एफआईआर दर्ज नहीं की। द्रमुक नेता के खिलाफ मामले को दबा दिया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पहली नजर में ठोस सबूत मिलने के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा। याची के अनुसार उसने सारे साक्ष्यों के साथ जांच ब्यूरो के निदेशक को पत्र लिखा था, लेकिन इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी ने 2007 में इस मामले में संचार सचिव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी पर विभाग ने इसकी मंजूरी ही नहीं दी।
याचिका में कहा गया है कि संचार मंत्री के रूप में दयानिधि मारन को दिल्ली स्थित अपने आवास पर मुफ्त टेलीफोन उपलब्ध था। अपने संसदीय क्षेत्र में भी वह नियमों के अनुसार टेलीफोन रख सकते हैं। जिसका खर्च सरकार को वहन करना पड़ता है, लेकिन समूचा टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करना पद का दुरुपयोग है।
मारन के निवास से यह लाइन उनके सन टीवी नेटवर्क के दफ्तर में ट्रांसफर कर दी गई। इसके लिए बीएसएनएल ने सारा खर्च उठाया।