सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी राहत प्रदान की है।
अदालत ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य सरकार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे से लाभ लेकर सरकारी नौकरी पाने वाली जातियों का आंकड़ा पेश करने को कहा था।
साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को भी तलब किया था। जबकि राज्य का कहना था कि जातिगत जनगणना लंबे समय से नहीं हुई है जो केंद्र की ओर से कराई जाती है। ऐसे में आंकड़े पेश करना संभव नहीं है।
जस्टिस एसएस निज्जर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की याचिका पर प्रति पक्षों को भी नोटिस जारी किया।
उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट ने 2006 में एक याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को इस संबंध में आंकड़ा जुटाने को कहा था।
इसके बाद गत वर्ष 21 दिसंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर अचानक राज्य को आंकड़े पेश करने का निर्देश देते हुए 11 जनवरी को प्रमुख सचिव को पेश होने को कहा।
जबकि राज्य ने जवाब में कहा कि जातिगत जनगणना केंद्र की ओर से किए जाने के बाद ही इस संबंध में आंकड़े दिए जा सकते हैं क्योंकि राज्य इस संबंध में आंकड़े नहीं जुटाता।
लेकिन हाईकोर्ट ने राज्य को तर्क को स्वीकार नहीं किया। यूपी सरकार ने सर्वोच्च अदालत से हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की जिस पर पीठ ने इस मामले में दिए गए हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी।