सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता पर अपने फैसले के खिलाफ कुछ केंद्रीय मंत्रियों के बयानों पर निराशा जताई है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कानून मंत्री कपिल सिब्बल सहित कुछ मंत्रियों के बयान सुखद और सराहनीय नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने मंत्रियों को भविष्य में ऐसे बयान देने के प्रति आगाह किया।
मंत्रियों के बयान को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी बयानों पर नाराजगी जताई। हालांकि पीठ ने मंत्रियों के खिलाफ कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस रंजन गोगोई की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, हम इस बात से सहमत हैं कि कुछ बयान बेहद तीखे हैं। वे लोग उच्च पदों पर बैठे हैं और जिम्मेदार भी हैं।
उन लोगों को कोई बयान देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। हम इन्हें अशोभनीय टिप्पणी करार देते हैं। कोर्ट ने कहा कि वित्त मंत्री पी चिदंबरम का बयान बहुत असहनीय नहीं है लेकिन कपिल सिब्बल, मिलिंद देवड़ा और जम्म-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान बेहद निराशाजनक हैं।
हालांकि कोर्ट ने मंत्रियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दिल्ली निवासी पुरुषोत्तम मुलोली ने दायर की थी।