सुप्रीम कोर्ट सेना के उप प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग की सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई करने के लिए बृहस्पतिवार को सहमत हो गया।
अदालत ने इस मामले को जुलाई के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्र मजीत सेन की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई सितंबर की बजाय जुलाई में करने के लिये इसलिए सहमत हुई क्योंकि लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग एक अगस्त को पदभार संभालेंगे।
उनकी नियुक्ति से जुड़े विवाद को इससे पहले ही सुलझाने की जरूरत है। पीठ लेफ्टिनेंट जनरल रवि दस्ताने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें नए सेना प्रमुख के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग के चयन में कथित पक्षपात का आरोप लगाया गया है। इससे पहले केंद्र ने नियुक्ति को लेकर अदालत में स्पष्टीकरण दिया था।
वीके सिंह भी कर चुके हैं विरोध
सरकार ने कहा था कि तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने जिस आधार पर अप्रैल और मई 2012 के बीच लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग पर अनुशासनात्मक प्रतिबंध लगाया था, वह अस्पष्ट और अवैध था।
जनरल सिंह (अब राजग सरकार में राज्य मंत्री) ने लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग को अनुशासनात्मक और सतर्कता (डीवी) प्रतिबंध के अंतर्गत रखा था।
सुहाग जब दीमापुर स्थित 3 कॉर्प्स कमांडर थे। उस समय सीधे उनके तहत काम करने वाली एक खुफिया इकाई के एक अभियान में कमान और नियंत्रण की कथित नाकामी के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया था।
अपने अंतिम दिनों में यूपीए-2 सरकार ने 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे जनरल विक्रम सिंह के बाद लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग का नाम नए सेना प्रमुख के तौर पर तय किया था।
सेना प्रमुख के पद पर सुहाग को नियुक्त किए जाने पर रोक लगाने की मांग लेफ्टिनेंट जनरल रवि दस्ताने ने की है, जिन्होंने सेना उपप्रमुख सुहाग को आर्मी कमांडर के पद पर पदोन्नति किए जाने को चुनौती दी थी।
अरूण जेटली भी दे चुके हैं सफाई
सुहाग को नियुक्ति किए जाने को लेकर रक्षा मंत्री अरुण जेटली स्पष्ट कर चुके हैं कि 13 मई के निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
जबकि दस्ताने ने सर्वोच्च अदालत में अपनी याचिका में दावा किया है कि आर्मी कमांडर के पद पर पदोन्नति के लिए उनकी फाइल को चयन समिति के समक्ष रखा ही नहीं गया।
उनका तर्क है कि सुहाग की योग्यता इस आधार पर कटघरे में थी क्योंकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक विजिलेंस जांच लंबित थी। सुप्रीम कोर्ट ने दस्ताने की याचिका पर सरकार को नोटिस कर दिया था।