संजय दत्त को समर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय और मिल गया है। कोर्ट के इस फैसले पर लोगों ने अमर उजाला डाट काम के फेसबुक पेज पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं।
संजय राय का कहना है कि कानून तो गरीब के लिए है। वीआईपी तो कानून के साथ खेलते हैं, कानून का मजाक बना रखा है, इस तरह तो सब अपने काम की दुहाई देते रहे तो फिर सजा किसको होगी, वीआईपी को या गरीब को? जाहिर सी बात है कि गरीबों को ही सजा मिलती रहेगी।
एक यूजर अमित कुमार का कहना है कि संजय दत्त ने अपराध किया है तो सजा मिलनी है। संजय दत्त तो क्या भगवान भी ऐसा काम करते तो उनको भी सजा मिलती। उनको चार सप्ताह तो क्या कल ही सजा मिलनी चाहिए थी।
वहीं, मोहसीन कमाल कहते हैं कि एक आदमी अपनी गलती का एहसास कर ले तो उसके लिए उससे बड़ी माफी और क्या हो सकती है। संजू को अपनी गलती का एहसास हो चुका है।
जबकि प्रीनु अरोड़ा का मानना है कि अगर कोई गरीब इस जगह होता तो अब तक जेल में सड़कर मर चुका होता। इस फैसले से पूरे देश में गलत संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ आम आदमी के लिए बना है, इसलिए इस देश के नेता और अभिनेता दोनों को सब माफ है।
राजेश सती राज कहते हैं कि संजय दत्त के कारण करोडों के प्रोजक्ट फंसे हुए हैं उसके लिए उनको मोहलत दी गई है। सवाल यह उठता है कि अगर कोई अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला हो और वो ऐसे संगीन अपराध करे तो क्या वो कोर्ट में अपने परिवार को पालने का हवाला देकर ऐसी अर्जियां लगाता रहे तो क्या उसे भी पेसै कमाने के लिए मोहलत दी जाएगी?