सुप्रीम कोर्ट ने गुवहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश पर मुहर लगा दी है जिसमें कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने केनिर्णय पर रोक लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अरूणाचल प्रदेश में सरकार बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इन 14 बागी विधायकों को अयोग्यता से संबंधित दस्तावेजों को परीक्षण केबाद यह निर्णय लिया है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की एकल पीठ का फैसला सही है। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया हमें एकलपीठ केआदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं बनता।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का परीक्षण करने केबाद सात जनवरी के एकलपीठ के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं दिखता। लिहाजा बुधवार को यथास्थिति बनाए रखने केअंतरिम आदेश को वापस लिया जाता है।
साथ ही संविधान पीठ ने कांग्रेस के 14 बागी विधायकों की अयोग्यता से संबंधित मामले को हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास भेज दिया है। खंडपीठ को दो हफ्ते के भीतर इस मामले का निपटारा करने के लिए कहा गया है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि भविष्य में होने वाली कोई भी कार्रवाई यहां लंबित मामले का निर्भर करेगा।
मालूम हो कि बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाने का निर्णय लेने के चंद घंटे बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि जब तक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नबम रेबिया द्वारा कांग्रेस केबागी 14 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने से संबंधित न्यायिक और विधानसभा केरिकार्ड का परीक्षण नहीं कर लिया जाता, वहां यथास्थिति बनी रहेगी।