प्लेटफॉर्म से छूटती ट्रेन को पकड़ने की कोशिश के दौरान दिल का दौरा पड़ने से व्यक्ति की मौत पर रेलवे को उसके परिवार को मुआवजा देना होगा।
मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की उस दलील को नकार दिया, जिसमें चलती ट्रेन के साथ-साथ प्लेटफार्म पर दौड़ने को अप्रिय घटना माने जाने पर सवाल उठाए गए थे।
अदालत के रुख पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि रेलवे मुआवजा देने को तैयार है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटना को अप्रिय घटना की श्रेणी में रखे जाने से संबंधी कानूनी सवाल पर बहस की जरूरत है।
चार मार्च, 2008 को सोमनाथन को अपनी पत्नी और बेटी के साथ कुंभकोनम जाना था। मगर तीनों डिंडूगल जंक्शन से तीनों एक गलत ट्रेन में चढ़ गए।
इसके बाद सोमनाथन तो उतर गए, लेकिन उनकी पत्नी-बेटी ट्रेन में ही रह गईं। वह ट्रेन के साथ प्लेटफॉर्म पर दौड़ने लगे और इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।