सुप्रीम कोर्ट ने गूगल, याहू जैसी वेबसाइटों को लिंग परीक्षण से संबंधित विज्ञापन ब्लॉक करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि भारत का कानून इसकी इजाजत नहीं देता है, लिहाजा विदेशी वेबसाइट इसका उल्लंघन नहीं कर सकते।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने यह आदेश केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद दिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने पीठ के समक्ष कहा कि प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण (पीएनडीटी) एवं संभावित गर्भपात से संबंधित जानकारी का प्रचार-प्रसार करने वाले यूआरएल (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर) को ब्लॉक किया जा सकता है, अगर इस बारे में उन तक जानकारी पहुंचाई जाए।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण, प्रसव पूर्व डायग्नोस्टिक, प्री- नैटल अल्ट्रासोनोग्राफी, सेक्स सेलेक्शन प्रोसीजर, सेक्स सेलेक्शन आदि ‘कीवर्ड’ की जानकारी उन तक पहुंचाई जाए तो उससे संबंधित यूआरएल को ब्लॉक करने में आसानी होगी। सरकार ने यह भी कहा कि गूगल, याहू, माइक्रोसाफ्ट आदि सर्च इंजन भी इस तरह के यूआरएल को ब्लॉक कर सकते हैं।
तत्काल प्रभाव से हटाए विज्ञापन
पीठ ने गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट आदि वेबसाइट से कहा कि वे इस तरह का विज्ञापन का प्रचार-प्रसार न करें, जो पीएनडी एक्ट, 1994 की धारा 22 और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत प्रतिबंधित है।
पीठ ने कहा कि अगर सर्च इंजन में इस तरह का विज्ञापन हो तो उसे तत्काल हटाया जाए। याचिकाकर्ता साबू मैथ्यू जार्ज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील समीर पारिख ने कहा कि सर्च इंजन को विश्व भर में उन सामग्रियों या सेवाओं, जिसे संबंधित देश का कानून इजाजत नहीं देता, को ब्लॉक करने का आदेश दिया जाता रहा है।
अदालत का यह आदेश इस मायने में बेहद अहम है, क्योंकि वर्ष 2014 में भारत में लिंग अनुपात प्रति 1000 पुरुष पर 940 महिला था। चिंता की बात यह है कि हरियाणा में यह अनुपात प्रति एक हजार पुरुष पर 857 महिलाएं, पंजाब में 863 महिलाएं, उत्तर प्रदेश में 874 महिलाएं, दिल्ली में 884 महिलाएं, राजस्थान 893 महिलाएं, जम्मू एवं कश्मीर में 895 महिलाएं और महाराष्ट्र में 896 महिलाएं हैं।