सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के राज्यसभा में मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका अपने पास स्थानांतरित करने की मांग को खारिज कर दिया। इस संबंध में एक पूर्व विधायक ने दिल्ली और इलाहाबाद में लंबित याचिकाओं को शीर्षस्थ अदालत में स्थानांतरित करने का आवेदन किया गया था।
इससे पहले भी इस मुद्दे पर सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा था। चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व विधायक राम गोपाल सिंह सिसौदिया की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता से कहा कि इस मामले को शीर्षस्थ अदालत में स्थानांतरित किए जाने की कोई जरूरत है।
ऐसा जरूरी नहीं है कि हर मामले को सीधे तौर सर्वोच्च अदालत लाया जाए। साथ ही पीठ ने स्थानांतरण याचिका को खारिज कर दिया। याद रहे कि उच्च सदन में सचिन के मनोनयन के खिलाफ दायर सिसौदिया की याचिका पर जस्टिस दीपक वर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
साथ ही कहा था कि अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका सीधे सर्वोच्च अदालत में क्यों दाखिल की गई। जबकि आप हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते थे। सीधे तौर पर यहां आकर तो आप खुद का नुकसान कर रहे हैं। इसके बाद पूर्व विधायक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर हुई। दोनों याचिकाओं को शीर्षस्थ अदालत स्थानांतरित करने की मांग सिसौदिया ने की थी।
हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं में कहा गया है कि अनुच्छेद 80 के तहत टीम इंडिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज को राज्यसभा में मनोनीत नहीं किया जा सकता। राज्यसभा में सिर्फ उन्हीं लोगों को मनोनीत किया जा सकता है, जिन्होंने विज्ञान, कला, साहित्य और भाषा के क्षेत्र में कुछ अलग हट कर किया हो।
याचिका में कहा गया है कि सचिन के पास ऐसी कोई योग्यता नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें राज्यसभा सदस्य का पद दिया जाए। इसके बावजूद उन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए मनोनीत किया गया है। उनका मनोनयन संविधान के प्रावधानों के मुताबिक नहीं है। इसलिए उनके मनोनयन को खारिज कर दिया जाना चाहिए।