सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को यह निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वह सभी पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक कर दें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा करना किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करना होगा, जो कि उसे संविधान के तहत मिला हुआ है। चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो-टूक कहा कि इस तरह का अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अदालत में आता है और कहता है कि वह वयस्क है, ऐसे में उसे घर की चारदीवारी के भीतर ऐसी चीजें देखने से कैसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद-21 (निजी स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।