सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के वर्ष 2011 में दिए गए एक फैसले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उड़ना पक्षियों का मूल अधिकार है और इन्हें पिंजड़े में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने जलाल भाई मोहम्मद आजम शेख की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिकाकर्ता के वकील सलमान खुर्शीद ने पीठ के समक्ष कहा कि पालतू पक्षियों को संरक्षण देने का कानून पहले से ही अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह कहना कि उड़ना पक्षियों का मूल अधिकार है, दोषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।