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क्या उड़ना पक्षियों का मूल अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच

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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के वर्ष 2011 में दिए गए एक फैसले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उड़ना पक्षियों का मूल अधिकार है और इन्हें पिंजड़े में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
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चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने जलाल भाई मोहम्मद आजम शेख की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।

याचिकाकर्ता के वकील सलमान खुर्शीद ने पीठ के समक्ष कहा कि पालतू पक्षियों को संरक्षण देने का कानून पहले से ही अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह कहना कि उड़ना पक्षियों का मूल अधिकार है, दोषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।
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गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

गुजरात हाईकोर्ट ने 12 मई 2011 को दिए अपने फैसले में कहा था कि पक्षियों को पिंजड़े में नहीं रखा जा सकता। आसमान में उड़ना उनका मूल अधिकार है। यह हर नागरिक का दायित्व है कि वह यह देखे कि पक्षियों को किसी तरह का कष्ट न हो।

इसके अलावा इस संबंध में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत कई राज्यों के पुलिस कमिश्नरों को भी नोटिस जारी किया है।

पेट लवर्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल याचिका में पुलिस द्वारा कुछ एनजीओ के साथ मिलकर पक्षियों को जब्त करने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई है।

आरोप लगाया कि अदालती आदेशों के बाद भी इन पक्षियों को उनके मालिकों के सुपुर्द नहीं किया जाता है। इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश न होने के कारण पक्षी प्रेमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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