सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की मानवता के आधार पर रिहाई की अपील ठुकरा दी है। इस अपील पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि ‘आप अपनी इच्छा से जेल में हो।’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों न संपत्तियों को बेचने के लिए एक रिसीवर नियुक्त कर दिया जाए। उधर, सेबी ने भी सुप्रीम कोर्ट मे अर्जी दायर कर कहा है कि सहारा की संपत्तियों पर रिसीवर नियुक्त किया जाना चाहिए।
जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुब्रत रॉय को पूर्व में किए गए उस दावे की याद दिलाई जिसमें रॉय ने कहा था कि सहारा समूह के पास अपने निवेशकों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त परिसंपत्तियां हैं। जस्टिस ठाकुर ने कहा, ‘परेशानी वाली बात यह है कि उक्त व्यक्ति (रॉय) ने कहा था कि उसके पास 1,85,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां हैं। रॉय ने अदालत से कहा था कि उनके पास काफी धन है लेकिन जब इसके पांचवें हिस्से का भुगतान करने की बारी आई तो वह इसे नहीं कर पा रहे हैं। आपको अपनी संपत्ति के पांचवें हिस्से का ही भुगतान करना है। एक ऐसा आदमी जिसके पास इतनी सारी संपत्ति है वह अपनी आजादी का त्याग जेल में रहने के लिए कर रहा है और अपनी संपत्ति को नहीं छोड़ रहा है। आप अपनी इच्छा से जेल में हो।’
अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सुब्रत रॉय के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पूरी नहीं हुई है, ऐसे में उन्हें जेल में रखना अदालत के लिए उचित नहीं है।