सुप्रीम कोर्ट ने नौकरीशाही में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए अहम आदेश सुनाया है। अधिकारियों ने पदोन्नति और स्थानांतरण के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।
सुप्रीमकोर्ट ने नौकरशाहों को राजनीतिक दबाव से भारी राहत देते हुए आज यह व्यवस्था दी कि उनके पदस्थापन में न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उस वक्त आया है जब आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल और अशोक खेमका के मामला चर्चा में हैं।
न्यायालय की पीठ ने यह भी कहा कि निश्चित कार्यकाल होने से उनमें व्यावसायिक-क्षमता और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा। नौकरशाही के कामकाज में गिरावट का प्रमुख कारण राजनीतिक हस्तक्षेप बताया है।
स्थायी कार्यकाल में मिलेगी मदद
न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी निर्देश दिया कि लोकसेवकों को निश्चित कार्यकाल देने के लिए तीन महीने के भीतर आदेश पारित करना चाहिए।
शीर्ष न्यायालय ने नौकरशाहों को यह भी अधिकार दे दिया कि वे राजनेताओं के जुबानी आदेश को फाइलों पर दर्ज करें ताकि किसी निर्णय के लिए उन्हें बाद में परेशान न किया जा सके।
न्यायालय ने कहा कि जुबानी आदेश की रिकार्डिंग से पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा और आम आदमी को भी सही जानकारी मिल सकेगी।
न्यायाधीश के.एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व कैबिनेट सचिव टी. एस. आर सुब्रमण्यम की जनहित याचिका पर यह व्यवस्था दी।