पुलिस सुधार मामले पर राज्यों के ढुलमुल रवैये पर सख्त सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों के मुख्य सचिवों को 31 जुलाई को व्यक्तिगत तौर पर तलब किया है।
दरअसल अदालत ने यह आदेश राज्यों की ओर से निहत्थे लोगों पर पुलिस के कथित बर्बर रवैये में सुधार लाने के मसले पर हलफनामा दाखिल करने और उसकी प्रति अदालत के सहायक को न भेजने पर जारी किया है।
सर्वोच्च अदालत ने पंजाब और बिहार में पुलिस बर्बरता के मामले की सुनवाई को विस्तृत करते हुए सभी राज्यों से 11 मार्च को जवाब तलब किया था।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सरकार पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार राज्यों के ढुलमुल रवैये के चलते मामले की सुनवाई को टालना पड़ता है। कभी हलफनामा नहीं दाखिल होता तो कभी अदालत के सहायक (एमाइकस क्यूरे) अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती को उसकी प्रति नहीं भेजी जाती।
इस मामले में सरकारें सहयोग नहीं कर रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जब तक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं चलेगा और उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाएगा, तब तक हलफनामा दाखिल करने और अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं होगा।
सर्वोच्च अदालत ने मार्च में इस मसले पर केंद्रीय गृह सचिव सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी किया।
पीठ ने चारों राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का आदेश जारी करते हुए मामले की सुनवाई 31 जुलाई तक टाल दी है। याद रहे कि प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों को अमल में न लाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब समय आ गया है कि उन निर्देशों पर फिर से गौर किया जाए।
गौरतलब है कि तरनतारन की घटना में चार मार्च को एक ट्रक ड्राइवर और उसके साथियों के परेशान किए जाने व अभद्र व्यवहार करने वाली लड़की की ही पुलिस वालों ने बुरी तरह से पिटाई कर दी थी।
दूसरी घटना में पांच मार्च को बिहार पुलिस ने पटना में विधानसभा के बाहर नौकरी में नियमित करने और समान वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे संविदा शिक्षकों पर लाठीचार्ज करने के बाद आंसू गैस के गोले दागे थे।