लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा न दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका की आड़ में राजनीतिक मुद्दे अदालत में हल नहीं किए जा सकते।
चीफ जस्टिस आरएम लोढा, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रोहिंटन नरीमन की पीठ ने कहा कि लोकसभा के स्पीकर का निर्णय अदालती समीक्षा के दायर में नहीं आता। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक मुद्दों का निपटारा नहीं कर सकता।
पीठ ने बिना किसी होमवर्क के याचिका दायर करने पर वकील मनोहर लाल शर्मा की खिंचाई की। वकील शर्मा का तर्क था कि नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा संसदीय अधिनियम, 1977 के आलोक में देखा जाना चाहिए।