उत्तर प्रदेश में भारी संख्या में शिक्षकों की पद रिक्त होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिरकार शिक्षकों के कितने पद रिक्त हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्कूलों में शिक्षक तो होने ही चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों के दावों की जांच करने के लिए कमेटी बनाने के लिए कहा है, जिनका कहना है कि सहायक अध्यापक की नियुक्ति के लिए शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित किए गए पैमाने पर खरा उतरने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेसिक एजुकेशन, इलाहाबाद को कमेटी का गठन कर तीन हफ्ते के भीतर उन दावों की जांच करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को कमेटी की जांच रिपोर्ट को वेबसाइट पर डालने के लिए कहा है। मालूम हो कि गत वर्ष 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सामान्य वर्ग में टीईटी में 70 फीसदी अंक और आरक्षित वर्ग में टीईटी में 65 फीसदी अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक नियुक्त किया जाए।